बड़सर(हमीरपुर)। जिला भर के अधिकतर निजी स्कूल बिना अनुमति से नर्सरी कक्षाएं चला रहे हैं। जो कि सरकार के नियमों को दरकिनार करके खूब चांदी कूट रहे हैं। प्रदेश शिक्षा बोर्ड द्वारा स्कूलों में पहली कक्षा से बच्चों को दाखिला करने की मान्यता दी जाती है। नन्हे बच्चों के लिए आंगनबाड़ी केंद्र खोले गए हैं। अलग से क्रैच स्कूल चलाने के बारे में अनुमति लेना अनिवार्य है। लेकिन जिला में अधिकतर निजी स्कूल सरकार के नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं और मोटी कमाई कर रहे हैं। जिला के शिक्षक संगठन और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता नर्सरी कक्षाएं चलाने वाले निजी स्कूलों पर कार्रवाई करने की मांग उठा रहे हैं। नूरपुर बस दुघर्टना में कई नन्हे बच्चों की जान चली गई थी, लेकिन इसके बावजूद निजी स्कूल नियमों की परवाह किए बगैर अपनी मनमानी कर रहे हैं।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सरोज कुमारी, अंजना कुमारी, कमलेश, सुषमा, सुनीता सहित अन्यों का कहना है कि निजी स्कूल अभिभावकों को प्रलोभन देकर दाखिल कर लेते हैं। इन स्कूलों में नर्सरी कक्षाएं चलाने की अनुमति तक नहीं है। ऐसे में इन स्कूलों में बच्चों का सही बौद्धिक विकास नहीं होता। आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों के लिए सुविधाएं उपलब्ध है।
राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष देश राज शर्मा का कहना है कि निजी स्कूल नर्सरी कक्षा से ही बच्चे का दाखिला कर लेते हैं। ऐसे में बच्चे सरकारी स्कूल में कम दाखिल हो रहे हैं। इस संबंध में प्रारंभिक शिक्षा निदेशक देश राज भरवाल का कहना है कि जब सरकारी स्कूलों में नर्सरी कक्षाएं नहीं चलाई जा सकती तो निजी स्कूल भी नर्सरी कक्षाएं नहीं चला सकते। क्रैच स्कूलों को चलाने के लिए अलग से सरकार की अनुमति लेनी होगी। उधर, सीडीपीओ बड़सर जेआर चौधरी का कहना है कि सरकार द्वारा नन्हे बच्चों के बौद्धिक विकास के लिए आंगनबाड़ी केंद्र खोले हैं। छोटे बच्चों के लिए अलग से क्रैच स्कूल चलाने के लिए सरकार अनुमति देती है। निजी स्कूल बिना अनुमति से नर्सरी कक्षाएं नहीं चला सकते।