हमीरपुर। प्रदेश के सबसे अधिक साक्षर जिले हमीरपुर के सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या में हर साल गिरावट आ रही है। जिले के 60 प्राइमरी स्कूलों में महज 2 से 10 विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। जबकि बिझड़ी ब्लाक की राजकीय प्राथमिक पाठशाला अंबोटा और सुजानपुर ब्लाक की सचुही पाठशाला में इस बार कोई दाखिला नहीं हुआ। जिले में कुल 480 प्राइमरी स्कूल सरकारी क्षेत्र में हैं। जबकि 40 प्राइमरी स्कूल निजी क्षेत्र में चल रहे हैं। लेकिन, सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों के कम होते रुझान ने शिक्षा जगत के विशेषज्ञों की चिंताएं बढ़ा दी हैं।
बच्चों की कम संख्या के कारण पूर्व के वर्षों में भी आठ स्कूल जिले में बंद हो चुके हैं। सरकारी आंकड़ों पर गौर करें तो जिले में 15 स्कूल ऐसे हैं, जहां पर कक्षा एक से पांचवीं कक्षा तक 6 से भी कम बच्चे हैं। जबकि 45 राजकीय प्राथमिक पाठशालाएं ऐसी हैं, जहां पर 6 से 10 बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। हमीरपुर जिला में अधिकतर सरकारी स्कूलों की लाज तो प्रवासियों के बच्चों के कारण बची हुई है। चौंकाने वाली बात तो यह है कि सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील और प्रशिक्षित अध्यापकों के बावजूद विद्यार्थियों की संख्या हर साल कम होती जा रही है। जहां सरकार दोपहर के भोजन पर हर माह लाखों रुपये खर्च कर रही है, वहीं एक प्रशिक्षित अध्यापक को प्रतिमाह 45 से 50 हजार रुपये से अधिक के वेतन समेत सरकारी सुविधाएं मिल रही हैं। लेकिन, अत्यधिक सुविधाओं के बावजूद न तो स्कूलों के परीक्षा परिणाम में सुधार हो रहा है और न ही बच्चों की संख्या बढ़ रही है। जिसके चलते प्रदेश सरकार को इस पर गंभीर रूप से मंथन करने की आवश्यकता है। उधर, प्रारंभिक शिक्षा उपनिदेशक देशराज बडवाल ने माना कि जिले के सरकारी स्कूलों में एक से पांचवीं कक्षा तक बच्चों की संख्या कम है। प्री-प्राइमरी कक्षाएं शुरू करने से बच्चों की संख्या बढ़ी है।