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बड़े उद्योगों को राहत, सूक्ष्म और लघु उद्योगों को कुछ नहीं

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हमीरपुर। केंद्र सरकार के बजट ने आम लोगों के साथ उद्योगपतियों और कारोबारियों को भी निराश किया है। इस बार के बजट से कारोबारियों को कोई बड़ी राहत नहीं मिल पाई है। हालांकि बड़े उद्योगों का जरूर ख्याल रखा गया है। 250 करोड़ के टर्नओवर वाली कंपनियों को कॉरपोरेट टैक्स में 25 फीसदी देना होगा।
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इसके साथ ही मध्यम, लघु और सूक्ष्म उद्योगों के विकास के लिए 3794 करोड़ से विकास की बात जरूर कही गई है। अन्य कोई औद्योगिक पैकेज व रियायत नहीं मिली है। इस बजट में करदाता जहां इनकम टैक्स स्लैब को बढ़ाने की उम्मीद लगाए बैठे थे उनकी इच्छाओं पर बजट खरा नहीं उतरा है। करदाता जहां इनकम टैक्स की लिमिट तीन से पांच लाख चाह रहे हैं। वहीं उन्हें बजट से ऐसा कुछ भी हीं मिला है।

क्या कहते हैं कारोबारी-
कारोबारी कनव शर्मा का कहना है कि बजट से सूक्ष्म और लघु उद्योगों को कुछ मिलने की उम्मीद लगाए बैठे थे। जीएसटी के सरलीकरण के साथ-साथ कारोबारियों ने इनकम टैकस के दायरे के बढ़ने की उम्मीद भी लगाई थी। टैक्स का दायरा न बढ़ने के कारण बजट कारोबारियों के लिए खरा साबित नहीं हुआ है।
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शांति वर्मा का कहना है कि बजट में केवल बड़े उद्योगों को राहत दी गई है। छोटे एवं लघु उद्योगों को सरकार ने ध्यान में नहीं रखा है। उद्योगों के लिए कोई भी पैकेज सरकार ने नहीं दिया है। इनकम टैैक्स स्लैब भी न बढ़ाकर सरकार ने कारोबारियों की आशा के विपरीत बजट पारित किया है।

व्यवसायी जोगिंद्र पुरी बल्ला का कहना है कि जीएसटी के बारे में सरकार ने कोई राहत प्रदान नहीं की है। इनकम टैक्स स्लैब बढ़कर पांच लाख रुपये होना चाहिए। आयकर के क्षेत्र में कोई कार्य न कर सरकार का बजट उम्मीदों के अनुसार नहीं उतरा है।

क्या कहते हैं पेंशनर
सेवानिवृत्त अध्यापक दुर्गा दास शर्मा का कहना है कि केंद्र सरकार के बजट में पेंशनरों के लिए कोई राहत नहीं है। सरकार ने सेवानिवृत्त कर्मचारियों को कोई राहत नहीं पहुंचाई है। सरकार का बजट सेवानिवृत्त कर्मचारियों के अनुसार खरा नहीं उतर पाया है। जो उम्मीदें सरकार से लगाई थी, उनके अनुकूल बजट पारित नहीं हुआ।
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