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जब सरहदों पर बहे खून के कतरे... कविता प्रस्तुत कर बटोरी तालियां

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हमीरपुर। भाषा एवं संस्कृति विभाग हमीरपुर ने संस्कृति भवन सलासी में वीररस और देशभक्ति को जागृत करने के लिए कवि सम्मेलन और सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें वरिष्ठ लेखकों, कवियों और लोक गायकों ने भाग लिया। उन्होंने अपनी वीर रस और देशभक्ति की कविताओं से देश के वीर जवानों और उनकी वीर गाथाओं को याद किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि लाल चंद ठाकुर ने की। यह कार्यक्रम जिला भाषा अधिकारी नीलम चंदेल और सहायक सूरम ठाकुर की देखरेख में हुआ। इस दौरान पुलवामा में शहीद हुए सैनिकों को मौन रखकर श्रद्धांजलि दी गई। कार्यक्रम में 25 से अधिक कवियों ने अपनी वीररस से परिपूर्ण रचनाएं प्रस्तुत कीं।
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रिया गौतम ने ‘भारतवर्ष की है दास्तान पुरानी, वीरों ने लिखी लहू से इसकी कहानी’ प्रस्तुत की। अदिती धूमल ने इस युग में कृष्ण का इंतजार न करो द्रोपदी, घोर कलियुग की है यह इक्कीसवीं सदी प्रस्तुत की। डॉ. पिंकी शर्मा ने ..तिरंगा अब पाक में फहराना है.. रचना प्रस्तुत की। रंजना पराशर ने आज ही तो जम्मू से चला था, गर्व कर तेरा पुत्र हूं मां.. प्रस्तुत की। रोहित विकास ने ..नहीं परवाह मुझे अपनी जान गवाने की, खुश हूं कि मेरा देश सलामत है.. प्रस्तुत की। कवि अभिषेक ने ..ढूंढता हूं मैं तुम्हें सुबह उन गलियों में.. रचना प्रस्तुत की। प्रसिद्ध कहानीकार संदीप शर्मा ने जब सरहदों पर बहे खून के कतरे, माटी का कर्ज तुझे पुकारे, तुम वीररस से देशभक्ति जगाना और उठना दोस्त कोई कविता कहना प्रस्तुत की। इसके साथ अन्य कवियों ने कविताएं प्रस्तुत कीं। इस दौरान साहिल म्यूजिक ल गु्रप ने लोक गीत और भजन प्रस्तुत किए।
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