हमीरपुर। एसडीएम हमीरपुर शिल्पी बेक्टा ने दो टूक कहा कि नियमों के विपरीत शहर में कोई भी भवन निर्माण नहीं होगा। शुक्रवार को हथली खड्ड के समीप बिना मंजूरी कॉलोनी बसाने के मामले में जमीनों के खरीदार और विक्रेता एसडीएम शिल्पी बेक्टा से मिले। शहर में बिना मंजूरी कॉलोनी बसाने का मामला पिछले एक साल से लटका हुआ है। 17 जून 2017 को भूमि विक्रेताओं और खरीदारों के बीच एक लिखित में एग्रीमेंट हुआ था। एग्रीमेंट के मुताबिक खरीददारों को सड़क, पानी, बिजली और सीवरेज की सुविधाएं भूमि विक्रेता ही उपलब्ध करवाएंगे। ‘अमर उजाला’ ने इस मामले को शुरू से प्रमुखता से उठाया है। मामला ध्यान में आने के बाद जिला प्रशासन ने जिला राजस्व विभाग को बेची जा रही भूमि की रजिस्ट्री रोकने के तत्काल आदेश पारित किए थे।
इसके साथ ही नगर परिषद और टीसीपी को भी संबंधित भूमि पर भवन निर्माण संबंधित कोई एनओसी नहीं देने के आदेश पारित किए थे। जिसके बाद इस मामले में जिला प्रशासन ने प्रदेश सरकार से क्लेरीफिकेशन मांगी थी। जिसका जवाब भी जिला राजस्व विभाग के पास अब पहुंच चुका है। लेकिन, इससे भूमि विक्रेताओं को बड़ी राहत नहीं मिली है। प्रदेश सरकार ने स्पष्ट किया है कि बिना परमिशन लैंड यूज नहीं बदला जा सकता। इसके साथ ही भूमि नंबर को तोड़कर प्लॉट बेचने से पहले भी मंजूरी लेनी होगी। केवल सालम नंबर का ही बंटवारा हो सकता है। इसके साथ ही लिखित अनुबंध के तहत भूमि विक्रेताओं ने खरीदारों को पानी, बिजली, सीवरेज और सड़क की सुविधा उपलब्ध करवानी है। इसके बिना खरीदे गए प्लाटों का इंतकाल नहीं हो सकता। इस मौके पर प्लॉट खरीदार पीसी सहगल, मेहर सिंह, कुलवंत सिंह अत्री, रविंद्र ठाकुर, देवराज शर्मा और इंजीनियर राकेश गर्ग समेत अन्य मौजूद रहे।
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क्या कहते हैं अधिकारी
एसडीएम शिल्पी बेक्टा ने कहा कि प्रदेश सरकार से क्लेरीफिकेशन आ चुकी है। तब तक बेचे गए प्लॉटों का इंतकाल नहीं हो सकता, जब तक औपचारिकताएं पूरी नहीं होती। नियमों के तहत बिल्डर एवं परमोटर लाइसेंस का होना, सड़क, पानी, बिजली और सीवरेज सुविधा उपलब्ध करवानी होगी, इसके बाद ही आगामी प्रक्रिया पर विचार होगा। इसके साथ ही भूमि खरीदारों को एक सोसायटी का गठन करने के लिए भी कहा है।
जिला राजस्व अधिकारी पवन कुमार शर्मा ने कहा कि सरकार के निर्देश मिल चुके हैं। केवल सालम नंबर का बंटवारा हो सकता है। जमीन का नंबर तोड़ कर प्लाट नहीं बिक सकते हैं। इसके साथ ही टीसीपी की सेक्शन 17 सी का उल्लंघन न हो, यह सुनिश्चित करना होगा।