हमीरपुर। नगर नियोजन एवं हरित क्षेत्र में बिना मंजूरी कॉलोनी बसाने की तैयारी कर रहे कारोबारियों को बड़ा झटका लगा है। जिला प्रशासन ने इस पर संज्ञान लेते हुए मामला विधि विभाग को भेज दिया है। इसके साथ ही जिला प्रशासन ने बिजली बोर्ड, आईपीएच, नगर परिषद और नगर नियोजन विभाग को चिट्ठी भेज कर बेचे गए प्लॉटों पर किसी भी तरह के निर्माण के लिए एनओसी न देने के आदेश जारी किए हैं।
जिला प्रशासन इससे पहले राजस्व विभाग को शेष बचे हुए प्लॉटों की रजिस्ट्री नहीं करने के आदेश दे चुका है। अब जिला प्रशासन के नए फरमान से कारोबारियों और प्लॉट खरीदारों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। खरीदारों को भवन के नक्शे, पानी, बिजली और सीवरेज कनेक्शन हासिल करने के लिए एनओसी की जरूरत रहती है। जिला प्रशासन से एनओसी पर रोक के आदेश जारी कर दिए हैं। इसके साथ ही राजस्व विभाग में भी हड़कंप मच गया है। चूंकि राजस्व विभाग की मिलीभगत से ही डेढ़ दर्जन लोगों ने खरीदे गए भूखंड की पहले खानगी तकसीम की और बाद में इसके प्लॉट बनाकर बेच दिए। उधर, एसडीएम हमीरपुर अरिंदम चौधरी ने कहा कि नगर नियोजन व ग्रीन एरिया में प्लॉटों की बिक्री का मामला विधि विभाग को भेज दिया है। आगामी कार्रवाई के बारे में विधि विभाग से सलाह ली जाएगी, तब तक बिजली, आईपीएच और नगर परिषद समेत तमाम विभागों को संबंधित क्षेत्र में भवन निर्माण के लिए आवश्यक एनओसी न जारी करने के आदेश दिए हैं।
ग्रीन एरिया में कंस्ट्रक्शन नहीं, कॉलोनी में यह सुविधाएं जरूरी-
ग्रीन एरिया में कोई कंस्ट्रक्शन नहीं हो सकती। वहीं कॉलोनी क्षेत्र में प्लॉटों की बिक्री के समय सीवरेज पाइप लाइन, सात से आठ मीटर चौड़ी सड़क, पार्क, बिजली ट्रांसफार्मर के लिए जगह, पानी की स्कीम के लिए जगह रखना अनिवार्य है। इसके अलावा कारोबारी के पास बिल्डर लाइसेंस का होना भी अनिवार्य है।