हमीरपुर। विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के कारण क्षेत्रीय अस्पताल हमीरपुर में ओपीडी 50 फीसदी घट गई है। अस्पताल में विशेषज्ञों की कमी के कारण दूसरे अस्पतालों में मरीजों को रेफर किया जा रहा है। वर्तमान समय में क्षेत्रीय अस्पताल में 120 मरीज दाखिल हैं। इससे पूर्व अस्पताल में 190 से 220 मरीज दाखिल रहते थे, लेकिन चिकित्सकों की कमी के कारण मरीजों को अन्य अस्पतालों को रेफर कर दिया जाता है। इस कारण स्थानीय अस्पताल में मरीजों की संख्या कम रह गई है।
अस्पताल में चिकित्सकों के कुल 29 पद स्वीकृत हैं। इनमें से दस विशेषज्ञ चिकित्सकों के पद अरसे से खाली चल रहे हैं। मेडिसिन विशेषज्ञ, सर्जन और ईएनटी विशेषज्ञ सहित अन्य सात चिकित्सकों के पद रिक्त होने के चलते लोगों को परेशानी का समाना करना पड़ रहा है। क्षेत्रीय अस्पताल हमीरपुर मात्र रेफरल संस्थान बनकर रह गया है। विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के कारण लोग अपना इलाज प्राइवेट या अन्य अस्पतालों में करवाना उचित समझ रहे हैं। इस कारण लोगों का क्षेत्रीय अस्पताल की तरफ रुझान कम हो रहा है। अस्पताल में बीते छह माह में सबसे कम मरीज चिकित्सकों की कमी के चलते भर्ती हुए हैं। इससे पूर्व विशेषज्ञ चिकित्सकों की मौजूदगी में अस्पताल में 190 से ज्यादा मरीज भर्ती रहते थे, अब यह संख्या लगभग आधी के करीब पहुंच गई है। सर्जन के अभाव में ऑपरेशन के ज्यादा गंभीर मामले अन्य अस्पतालों को रेफर किए जाते हैं। वहीं, मेडिसिन विशेषज्ञ के न होने के कारण मुख्य दवाइयां व टीके आदि के लिए भी मरीजों को अन्य अस्पतालों के लिए रेफर कर दिया जाता है। जिस कारण क्षेत्रीय अस्पताल में मरीजों की संख्या में कमी आई है।
उधर, क्षेत्रीय अस्पताल के एसएमओ डॉ. रमेश चौहान का कहना है कि अस्पताल में मरीजों के दाखिल होने की संख्या में कमी आई है। विशेषज्ञ चिकित्सकों के अभाव में ज्यादातर मामले अन्य अस्पतालों को रेफर कर दिए जाते हैं। अरसे से विशेषज्ञ चिकित्सकों के पद रिक्त चल रहे हैं। पदों को भरने के लिए उच्चाधिकारियों को अवगत करवाया गया है।
लिफ्ट भी खराब, अव्यवस्थाओं का आलम
क्षेत्रीय अस्पताल के नए भवन में लगी लिफ्ट भी एक अरसे से खराब चली हुई है। इस नए भवन में अस्पताल की एक्स-रे व अल्ट्रासाउंड लैब मौजूद है। लैबों में टेस्ट करवाने आने वाले गंभीर मरीजों को लिफ्ट सुविधा न होने के कारण सीढ़ियों से जाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। खराब लिफ्ट के अंदर व्हील चेयर पड़ी रहती हैं। वहीं अस्पताल परिसर में बैठने के लिए लगी कुर्सियां भी टूट चुकी हैं। टूटी कुर्सियों को हटाने की जहमत अस्पताल प्रबंधन ने नहीं की है। जिस कारण मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ती है।