हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में गुड़िया मामले में दोषी चिरानी नीलू को जिला अदालत शिमला की ओर से आजीवन कारावास की सजा के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई हुई। यह सुनवाई न्यायाधीश अजय मोहन गोयल और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ कर रही है। अदालत में दोषी की ओर से पेश अधिवक्ता ने सीबीआई की ओर से जुटाए साक्ष्यों पर सवाल उठाए खंडपीठ ने पूछा कि क्या अपराधी ने इससे पहले भी कोई अपराध किया है।
इस पर अधिवक्ता ने कहा कि सिरमौर की अदालत ने हत्या के एक मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी, जिसे हाईकोर्ट ने 10 साल कर दिया। इसके बाद अदालत ने कहा कि ऐसा कौन सा कारण है, जिससे दोषी व्यक्ति अपने आप को बेकसूर साबित कर सके। इस पर अदालत को अवगत कराए। अधिवक्ता ने दलीलों में कहा कि सीबीआई ने याचिकाकर्ता को एक साल बाद गिरफ्तार किया, जबकि गुड़िया की हत्या इससे पहले हो चुकी थी।