देश के सम्मान का प्रतीक ‘जार्ज क्रास’ मेडल 10 साल बाद वापस भारत आएगा। ब्रिटिश हुकूमत के दौरान हिमाचल के सैनिक किरपा राम को बहादुरी के लिए मिले जार्ज क्रास मेडल को लंदन की अदालत ने भारत वापस भेजने के आदेश दिए हैं।
लंदन के जिस व्यक्ति के पास यह मेडल था, उसने केस वापस ले लिया है। दोनों पक्षों में बाहर समझौते के बाद लंदन की अदालत ने जार्ज क्रास को भारत भेजने की स्वीकृति दी है। इस फैसले से स्व किरपा राम के परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई है।
ब्रिटिश शासनकाल के दौरान 13वीं फ्रंटियर फोर्स राइफल में तैनात बिलासपुर के भपराल गांव के किरपाराम को लोगों की जान बचाने की एवज में बतौर इनाम ‘जार्ज क्रास’ मिला था।
बताया जाता है कि ट्रेनिंग के दौरान एक रंगरूट ने गलती से ग्रेनेड वहीं फेंक दिया जिसे दूर फेंकते वक्त किरपा राम की जान चली गई।
यह घटना सितंबर 1945 की है। किरपा राम को मरणोपरांत वर्ष 1947 में यह सम्मान दिया गया। वर्ष 2002 में यह अचानक बिलासपुर में उनके घर से गायब हो गया। वर्ष 2002 में इस मामले में बाकायदा एफआईआर भी दर्ज हुई। वर्ष 2009 में मामला उस वक्त सुर्खियों में आया, जब लंदन में जार्ज क्रास की नीलामी की खबर आई।
इस दौरान हिमाचल सीआईडी ने जार्ज क्रास को वापस लाने के लिए इंटरपोल की भी मदद मांगी। भारत सरकार ने तब इसकी नीलामी रुकवा दी। लंदन में जिस शख्स के पास जार्ज क्रास था, उसका दावा था कि उसने इसे खरीदा है। इसके बाद मामला लंदन के कोर्ट में पहुंचा।
जो शख्स जार्ज क्रास पर अपना दावा कर रहा था, अब उसने केस वापस कर लिया है। इसके बाद हाईकोर्ट जस्टिस क्वींस बैंच लंदन डिवीजन ने मेडल भारत भेजने की अनुमति दी है।
यह फैसला इसी महीने हुआ है। मामले से जुड़े रहे अधिवक्ता सुरेंद्र ठाकुर ने बताया कि दोनों पक्षों में समझौते के बाद जार्ज क्रास को भारत ले जाने के आदेश कोर्ट ने दिए हैं। उनके अनुसार इंग्लैंड के सीनियर सोलीसीटर विजय शर्मा ने केस में कड़ी मेहनत की है। इस वर्ष दिसंबर तक जार्ज क्रास को भारत लाने की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।