हिमाचल प्रदेश के तीन प्रसिद्ध शक्तिपीठों में लाखों का गोलमाल सामने आया है। अधिकारियों ने कथित तौर पर फायदा पहुंचाने के लिए एक ऐसी कंपनी से अधिकतम दरों पर जनरेटर खरीद लिए, जिसका नाम टेंडर में ही नहीं था। चामुंडा, ज्वालाजी और बज्रेश्वरी मंदिर के लिए की गई खरीद में गोलमाल लगभग साढे़ सात लाख का है। पहले निविदाएं आमंत्रित की गईं मगर बाद में बिड करने वाली तीनों फर्मों की बजाय किसी गैर फर्म से खरीद कर ली गई। 2010 की ताजा आडिट रिपोर्ट में यह बात सामने आई है।
टीम ने बाकायदा रिपोर्ट में ऐसे अधिकारियों के प्रति कार्रवाई की अनुशंसा करने के अलावा मंदिर न्यासों को हुई वित्तीय हानि की वसूली करने के भी निर्देश दिए हैं। मंदिर आयुक्त एवं जिलाधीश कांगड़ा ने न्यास को 125 केवीए क्षमता का जनरेटर खरीदने की स्वीकृति दी थी।
न्यास ने हालांकि तीन फर्मों सुधीर जेनरेटर लिमिटेड (छह लाख), जगत गोपाला एंड कंपनी (7 लाख 32 हजार) और ग्रीन फील्ड इंटर प्राइजेज (5 लाख 98 हजार) की निविदाएं भेजीं। कनिष्ठ अभियंता, मंदिर अधिकारी और सहायक आयुक्त की ओर से तुलनात्मक अध्ययन के बाद उक्त जनरेटर का ग्रीन फील्ड फर्म से क्रय किया जाना अपेक्षित था।
लेकिन 125 केवीए की बजाय 160 केवीए के तीन जनरेटर सेट 8 लाख 47 हजार 321 रुपये प्रति की खरीद दूसरी कंपनी से कर ली गई। ये जनरेटर तीनों मंदिरों में स्थापित किए गए। यानी, प्रति जनरेटर मंदिर न्यासों को 2 लाख 49 हजार 321 रुपये की वित्तीय हानि हुई। टीम ने चूककर्ता अधिकारियों तथा कर्मचारियों से क्षतिपूर्ति की अनुशंसा की है।
जिला स्तर पर हुई खरीद
ज्वालामुखी मंदिर न्यास के सहायक आयुक्त एवं एसडीएम एसके पराशर ने माना कि इस तरह की खरीद हुई है, जो जिला स्तर पर हुई थी। लिहाजा. उन्हें इस बारे किसी तरह की आधिकारिक जानकारी नहीं है।
गड़बड़ी की होगी जांच
शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा और ज्वालामुखी के विधायक संजय रतन का कहना है कि मंदिर न्यासों में खरीद के दौरान अगर किसी तरह की गड़बड़ी हुई है तो जांच करवाई जाएगी। मामले में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों से इसकी वसूली की जाएगी।