केंद्रीय दवा नियंत्रक डा. जीएन सिंह ने कहा कि विदेशों में भारत की छवि खराब करने के लिए चीन यहां की कंपनियों के नाम से नकली दवाइयां भिजवा रहा है। लेकिन अब इसका सच सामने आ गया है।
उन्होंने दावा किया कि विदेशी कंपनियों के भारत में नकली दवा बनाने के दावों की पोल खुल गई है। इंडिया का मार्केट विदेशों में खराब करने के मकसद से चीन यहां की कंपनियों के नाम से नकली दवाएं भेज रहा है। इन मामलों को कई बार रंगे हाथ पकड़ा गया है।
दवा की जांच के लिए एक कमेटी का गठन कर देश के विभिन्न स्थानों पर दवाइयों के 25 हजार सैंपल लिए गए जिसमें मात्र 2 सैंपल ही फेल हुए हैं। इससे स्पष्ट है कि भारत में उच्च गुणवत्ता की दवाइयां बनाई जाती हैं।
हिमाचल के बद्दी पहुंचे केंद्रीय दवा नियंत्रक ने बताया कि सेफ्टी व स्टेबिलिटी डाटा जमा करने के लिए अब दवा निर्माताओं को दिल्ली नहीं जाना पड़ेगा। अब चंडीगढ़ स्थित क्षेत्रीय कार्यालय में इसे जमा करा सकते हैं। उन्होंने दवा निर्माताओं को जहां डीपीसी एक्ट 2013 से अवगत कराया, वहीं सेफ्टी व स्टेबिलिटी डाटा जमा कराने के लिए एक माह की मोहलत देने के दवा निर्माताओं के आग्रह के मान लिया है।
ड्रग प्राइज कंट्रोल व बारकोटिंग के मामले को उन्होंने मंत्रालय के समक्ष रखने की बात कही।
केंद्रीय औषधि नियंत्रक ने दवा निर्माताओं से आग्रह किया कि वह छोटे मोटी शिकायतों के लिए कोर्ट के दरवाजा न खटखटाएं, इससे देश की छवि खराब होती है। अपने कार्य को कानून के तहत पूरा करें तथा पारदर्शिता लाएं तो रेगुलेरटी कमेटी दवा निर्माताओं को पूरा सहयोग करेगी।