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अब यूं ही नहीं मिलेगी हर किसी को किराये की कोख

Mon, 17 Jun 2013 12:11 PM IST
शिमला/सुरेश शांडिल्य
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भारत में अब किराये की कोख हर किसी को यूं ही नहीं मिलेगी। लिव-इन रिलेशन में रहने वाले किराये की कोख नहीं ले सकेंगे।
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गे और लेसबियन को भी सरोगेसी का लाभ नहीं मिल पाएगा। केवल विवाहित नि:संतान दंपति ही सरोगेट मदर की मदद से बच्चा पा सकेंगे। दो बच्चों की स्वस्थ मां ही सरोगेट मदर बन पाएगी।

यह खुलासा इस ड्राफ्ट को बनाने में अहम भूमिका निभाने वाली भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के उपनिदेशक डॉ. आरएस शर्मा ने किया है।

इतना ही नहीं, दूसरे बच्चे के जन्म के दो साल बाद ही कोई महिला सरोगेट मदर बनने के लिए पात्र होगी और 21 से 35 साल की महिला ही सरोगेट मदर बन सकेगी।

भारत सरकार ने सरोगेसी को लेकर प्रस्तावित कानून के ड्राफ्ट में ये संशोधन किए हैं। जल्द ही इस ड्राफ्ट को केंद्रीय कैबिनेट के समक्ष रखने की तैयारी है।

शर्मा ने बताया कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने असिस्टिड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलाजी बिल 2013 का संशोधित ड्राफ्ट विधि मंत्रालय को भेज दिया है।

हिमाचल समेत पूरे देश में नि:संतान दंपति सरोगेट मदर के जरिए संतान सुख पा रहे हैं। मां के अंडकोश और पिता के स्पर्म को गैर महिला के गर्भ में प्रत्यारोपित कर बच्चे पैदा किए जा रहे हैं। इसकी वैधता पर अभी कोई कानून नहीं है।
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वर्ष 2005 में गाइडलाइंस बनी हैं, लेकिन इनका पालन नहीं होने की सूरत में दोषी को दंड का कोई प्रावधान नहीं है। इसके लिए असिस्टिड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलाजी बिल 2010 ड्राफ्ट बनाया, लेकिन खामियों के चलते यह कानून की शक्ल नहीं ले सका। अब सरकार ने विचार-विमर्श के बाद नया ड्राफ्ट तैयार किया है।
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डॉ. आरएस शर्मा ने कहा कि अब सरकार के निर्देश पर परिषद ने नया विधेयक तैयार कर विधि विभाग की राय के बाद कानून मंत्री को भेजा है।

पूर्व के ड्राफ्ट में लिव-इन, गे और लेसबियन रिलेशन के लिए सरोगेसी पर रोक नहीं थी और इसमें पांच बच्चों वाली माताओं को भी सरोगेट मां बनने की छूट थी।

राज्य स्तर पर बनेंगे बोर्ड
प्रस्तावित कानून के तहत हर राज्य में इसके लिए एक बोर्ड बनेगा। इसमें सरोगेसी का लाभ देने वाले हर क्लीनिक का पंजीकरण होगा। इसकी सिविल कोर्ट की भूमिका भी होगी। कानून तोड़ने पर यह संबंधित मामलों की सुनवाई करेगा। यह दोषी को न्यूनतम तीन साल की कैद और लाखों रुपये का जुर्माना करेगा।
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