हिमाचल में बिजली की नई दरें तय करने के लिए हिमाचल प्रदेश बिजली कंपनी ने राज्य विद्युत नियामक आयोग में अपनी टैरिफ याचिका दायर कर दी है। अब आयोग 120 दिनों के भीतर नई दरों पर अपना फैसला देगा।
बिजली बोर्ड कंपनी की ओर से बनाए गए प्रस्ताव में चालू वर्ष में प्राप्तियों और खर्च में 925 करोड़ के लगभग का अंतर दिखाया गया है। इसके साथ ही आगामी वर्ष के लिए प्राप्तियों और व्यय के अंतर को 297.33 करोड़ दिखाया है। इसे पूरा करने के लिए बिजली की दरों में बढ़ोतरी का प्रस्ताव किया है।
वित्तीय वर्ष 2013-14 के लिए कंपनी के प्रस्ताव में व्यय 4127.8 करोड़ और प्राप्तियां 3830.47 करोड़ की दिखाई है। नियामक आयोग ने यदि दरें बढ़ाने का फैसला दिया तो फिर बिजली बोर्ड और सरकार को इसे उपभोक्ताओं पर लागू करने पर फैसला लेना होगा। यदि सरकार ने सब्सिडी नहीं बढ़ाई, तो घरेलू उपभोक्ताओं के लिए भी बिजली महंगी हो सकती है।
राज्य में 16 लाख घरेलू और 2 लाख कामर्शियल विद्युत उपभोक्ता हैं। आयोग की ओर से सभी पक्षों की सुनवाई के बाद ही बिजली की नई दरों पर फैसला लिया जाना है। राज्य विद्युत नियामक आयोग की ओर से नई दरें घोषित होने के बाद घरेलू उपभोक्ताओं को इससे बचाए रखना, सरकार की नीति पर निर्भर करेगा।
वर्तमान में सरकार की ओर से मिलने वाली लगभग 200 करोड़ की सब्सिडी के बाद ही घरेलू उपभोक्ताओं के वर्तमान वित्तीय वर्ष के लिए प्रस्तावित नई बिजली दरों से दूर रखा जा सकेगा। आगे भी हिमाचल सरकार की ओर से सब्सिडी जारी रहती है तो ही घरेलू उपभोक्ताओं पर आयोग की घोषित नई दरों से दूर रखा जा सकेगा।
हालांकि बिजली की दरें बढ़ेंगी या स्थिर रहेगी, यह आयोग के फैसले पर निर्भर करेगा, लेकिन बिजली कंपनी की ओर से दर्शाया गया 925 करोड़ का आय व्यय का अंतर साफ संकेत दे रहा है कि आने वाले वर्ष के लिए कंपनी की ओर से बिजली की दरों में बढ़ोत्तरी प्रस्तावित की गई है।
राज्य विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष सुभाष नेगी ने माना कि बिजली कंपनी की ओर से टैरिफ याचिका दायर कर दी गई है। इस मामले पर आयोग में तय प्रक्रिया के अनुसार ही कार्यवाही शुरू की गई है।