झोपड़ी में स्कूल का रिकॉर्ड, छुट्टी पर अध्यापक घर ले जाते हैं रजिस्टर
स्कूल में भवन न होने का असर केवल बच्चों की पढ़ाई तक सीमित नहीं है। शिक्षकों को भी रोजाना कई तरह की परेशानियों से जूझना पड़ रहा है। स्कूल का सामान एक ऐसी झोपड़ी में रखा जाता है, जिसमें दरवाजा तक नहीं है। रिकॉर्ड और जरूरी दस्तावेज को सुरक्षित रखने के लिए भी कोई उचित व्यवस्था नहीं है। मौसम खराब होने या अवकाश के दिन अध्यापकों को स्कूल के रजिस्टर अपने साथ घर ले जाने पड़ते हैं। स्कूल के प्रभारी जीवन सिंह सिंगटा ने बताया कि पाठशाला एक टीन शेड में चल रही है। इसी शेड में मिड-डे मील भी तैयार किया जाता है। भवन के अभाव में स्कूल को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
एसएमसी अध्यक्ष ने उठाए सवाल
एसएमसी अध्यक्ष नेका ने कहा कि स्कूल के लिए भवन नहीं होने से बच्चों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। आज के आधुनिक दौर में भी बच्चों को बिना भवन वाले स्कूल में पढ़ने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। उन्होंने स्कूल के लिए जल्द भवन उपलब्ध करवाने की मांग की।
विभाग से किया जा है पत्राचार
शिक्षा खंड अधिकारी राजपाल चौधरी ने बताया कि वन विभाग के साथ इस मामले में पत्राचार किया जा रहा है। इसमें करीब छह महीने का समय और लग सकता है। जमीन उपलब्ध होने के बाद ही स्कूल भवन के लिए बजट स्वीकृत हो पाएगा। विभाग की ओर से भवन निर्माण के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।