विधायक राकेश जम्वाल, रणधीर शर्मा, अनुराधा राणा और आशीष बुटेल के सवाल का लिखित जवाब देते हुए शिक्षा मंत्री ने कहा कि यह सभी विद्यालय सत्र 2026-27 से सीबीएसई के तहत संचालित होंगे। एक विद्यालय को सीबीएसई से जोड़ने में लगभग 45 हजार रुपये खर्च हुए हैं, जिसे संबंधित स्कूलों ने अपनी निधि से वहन किया है। इन विद्यालयों की हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड से संबद्धता समाप्त हो चुकी है। हालांकि, वर्ष 2026-27 में कक्षा 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं प्रदेश शिक्षा बोर्ड ही आयोजित करेगा।
वहीं, सीबीएसई पैटर्न के तहत पहली बोर्ड परीक्षाएं वर्ष 2028 में आयोजित होंगी। सीबीएसई और स्कूल शिक्षा बोर्ड दोनों ही एनसीईआरटी आधारित पाठ्यक्रम पढ़ाते हैं। सीबीएसई में हिंदी माध्यम सहित अंग्रेजी और अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में पढ़ाई का विकल्प उपलब्ध रहेगा। सामाजिक विज्ञान, गणित, विज्ञान और वाणिज्य वर्ग के विषय हिंदी माध्यम में भी पढ़ाए जा सकेंगे। कुछ स्कूलों में कार्यरत एसएमसी शिक्षकों के भविष्य को लेकर निर्णय संबंधित स्कूल प्रबंधन समितियां लेंगी।
कृषि-बागवानी विषय को अनिवार्य बनाने का विचार नहीं
विधायक कुलदीप सिंह राठौर के सवाल का लिखित जवाब देते हुए शिक्षा मंत्री ने कहा कि फिलहाल कक्षा 6 से 12 तक कृषि एवं बागवानी विषय को अनिवार्य बनाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। कृषि विषय पहले से ही 9वीं से 12वीं तक व्यावसायिक विषय के रूप में पढ़ाया जा रहा है। वहीं, बागवानी विषय को भी इसी सत्र से 9वीं से 12वीं तक वैकल्पिक व्यावसायिक विषय के रूप में शुरू किया जा रहा है।