नगर एवं ग्राम नियोजन मंत्री राजेश धर्माणी
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नगर एवं ग्राम नियोजन मंत्री राजेश धर्माणी ने कहा कि वन भूमि की किस्म को बदला नहीं जा सकता। होटल मनाली वैली के निर्माण की जांच की जाएगी। इस मामले में कई तरह की अनियमितताएं मिली हैं। एनजीटी ने भी इसको लेकर संज्ञान लिया। शुक्रवार को प्रश्नकाल के दौरान धर्मपुर से कांग्रेस विधायक चंद्रशेखर ने मामला उठाते हुए कहा कि एनजीटी को भी गुमराह किया गया है। एक प्रभावशाली व्यक्ति ने अफसरों पर दबाव बनाकर कोर्ट में गलत तरह के शपथपत्र पेश करवाए। कानून की धज्जियां उड़ाई गईं।
उन्होंने कहा कि इस मामले को लेकर राजस्व विभाग में बड़ा खेल खेला गया। ऐसे में नगर एवं ग्राम नियोजन के साथ राजस्व विभाग के अफसरों की एक टीम बनाकर मामले की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए। जवाब में धर्माणी ने कहा कि होटल मनाली वैली निर्माण की जांच रिपोर्ट से सदन को भी अवगत कराया जाएगा। होटल का दो मंजिला भवन 93.2 वर्ग मीटर में बना हुआ है। इसमें 34 वर्ग मीटर भूमि पर अतिरिक्त निर्माण किया गया। होटल के लिए पार्किंग के निर्धारित स्थान का इस्तेमाल रिहायश के लिए किया गया। वर्ष 2017 में एनजीटी ने इसको लेकर आदेश पारित किया था। इसके बाद प्रशासन ने भवन में अवैध रूप से बनाईं दो मंजिलों को गिरा दिया है। पार्किंग में जो रिहायश बनाई थी, उसे भी गिराकर अब इसे पार्किंग के रूप में ही उपयोग किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि एनजीटी के आदेशाें पर अमल किया गया है। जो पेड़ काटे गए थे, उसकी एवज में एक हजार नए पौधे निजी व वन भूमि पर लगाए जा चुके हैं। विधायक ने जो बातें उनके ध्यान में लाई हैं, उसको लेकर सरकार जांच करवाएगी। उधर, विधायक चंद्रशेखर ने कहा कि एनजीटी ने जो ऑर्डर पास किया है, उसके अनुरूप कार्रवाई नहीं की गई है। झूठे शपथपत्र दायर किए गए, जो जांच का विषय हैं।