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CBSE की बड़ी चूक: 9वीं में सोशल साइंस और कंप्यूटर अनिवार्य, लेकिन किताबें अब तक नहीं

Fri, 26 Jun 2026 11:21 AM IST
Ankesh Dogra विपिन चौधरी, धर्मशाला।

सार

हिमाचल प्रदेश में नई शिक्षा नीति के तहत कक्षा 9 में सोशल साइंस और कंप्यूटर शिक्षा अनिवार्य कर दी गई है, लेकिन सीबीएसई और एनसीईआरटी अब तक इन विषयों की किताबें उपलब्ध नहीं करा सके हैं। शैक्षणिक सत्र शुरू हुए ढाई माह बीत चुके हैं। शिक्षक बिना किताबों के पढ़ाने को मजबूर हैं और विद्यार्थी असमंजस में हैं। पढ़ें पूरी खबर...

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सीबीएसई - फोटो : सीबीएसई
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश में नई शिक्षा नीति के तहत नौवीं कक्षा में सोशल साइंस और कंप्यूटर शिक्षा को अनिवार्य तो कर दिया गया लेकिन इन विषयों की किताबें उपलब्ध करवाना सीबीएसई और एनसीईआरटी भूल गए हैं। नया शैक्षणिक सत्र शुरू हुए ढाई माह से ज्यादा का समय बीत चुका है, मगर सरकारी और निजी सीबीएसई स्कूलों के हजारों विद्यार्थियों के हाथों में अब तक इन विषयों की पुस्तकें नहीं पहुंची हैं। किताबें न होने से इनकी नियमित पढ़ाई भी शुरू नहीं हो पाई है। हैरानी की बात यह है कि जिन विषयों को अनिवार्य बनाया गया, उनकी किताबों की पीडीएफ तक एनसीईआरटी की वेबसाइट पर उपलब्ध नहीं हैं। 

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एनसीईआरटी की वेबसाइट पर पीडीएफ के लिए कमिंग सून लिखा आ रहा है। ऐसे में विद्यार्थी और शिक्षक दोनों असमंजस की स्थिति में हैं। स्कूलों में शिक्षक बिना किताबों के नोट्स और पुराने पाठ्यक्रम के सहारे पढ़ाई करवाने को मजबूर हैं, जबकि विद्यार्थियों को समझ नहीं आ रहा कि आखिर किस पाठ्यक्रम की तैयारी करें। कांगड़ा जिले के कई बुक डिपो संचालकों ने भी सोशल साइंस और कंप्यूटर विषय की किताबें उपलब्ध न होने की पुष्टि की है। बुक डिपो संचालकों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि नई पुस्तकों की आपूर्ति अब तक नहीं हुई है और न ही उनके पास इनकी उपलब्धता को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी पहुंची है। इससे अभिभावकों को भी बार-बार बाजार के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। सरकारी और निजी स्कूल प्रबंधन भी इस स्थिति से परेशान हैं। 

उनका कहना है कि सत्र शुरू होने से पहले ही पाठ्यपुस्तकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए थी। अब दो माह बाद भी विद्यार्थी किताबों का इंतजार कर रहे हैं और पढ़ाई प्रभावित हो रही है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि जब विषयों को अनिवार्य करने का फैसला पहले ही लिया जा चुका था, तो समय रहते किताबों के प्रकाशन और वितरण की व्यवस्था क्यों नहीं की गई।

एचपी बोर्ड के अधीन कर देने चाहिए स्कूल : सुनील
हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष सुनील शर्मा ने कहा कि प्रदेश सरकार अपने ही एचपी बोर्ड को दरकिनार कर सीबीएसई स्कूलों को बढ़ावा देने की बात कर रही है। लेकिन इन स्कूलों में किताबें तक मुहैया नहीं हो पा रही हैं। इसके विपरीत एचपी बोर्ड ने सत्र शुरू होने से पहले ही किताबों को स्कूलों में पहुंचा दिया था। 
 

आयुर्वेद विभाग में पंचकर्मा टेक्नीशियन कोर्स होगा शुरू
हिमाचल प्रदेश में पहली बार आयुर्वेद में पंचकर्मा टेक्नीशियन कोर्स शुरू किया जा रहा है। शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए एक वर्षीय कोर्स में प्रवेश के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। इच्छुक अभ्यर्थी 4 जुलाई शाम पांच बजे तक आवेदन कर सकते हैं। प्रदेशभर में इस कोर्स के लिए कुल 256 सीटें निर्धारित की गई हैं, जिनमें 128 पुरुष और 128 महिला अभ्यर्थियों का चयन किया जाएगा।
 

विभाग के अनुसार प्रवेश मेरिट के आधार पर होगा। इसके लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता 12वीं पास रखी गई है। अभ्यर्थियों की आयु 1 अगस्त 2026 को 17 से 35 वर्ष के बीच होनी चाहिए। प्रशिक्षण शुल्क 30 हजार रुपये प्रतिवर्ष निर्धारित किया गया है, जिसे तीन समान किस्तों में जमा करवाया जाएगा। कांगड़ा जिले के जिला आयुर्वेदिक अस्पताल धर्मशाला और आयुर्वेदिक अस्पताल देहरा में 16-16 सीटें उपलब्ध होंगी। वहीं, पपरोला स्थित आरजीजीपी आयुर्वेदिक कॉलेज एवं अस्पताल में सबसे अधिक 36 सीटों पर प्रवेश दिया जाएगा। कोर्स के दौरान विद्यार्थियों को थ्योरी और प्रैक्टिकल ज्ञान दिया जाएगा। जिला आयुष अधिकारी कांगड़ा डॉ. बृज नंदन शर्मा ने बताया कि आयुर्वेद विभाग में पंचकर्मा टेक्नीशियन का एक वर्षीय कोर्स शुरू किया जा रहा है। शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए प्रवेश प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इच्छुक अभ्यर्थी 4 जुलाई शाम पांच बजे तक आवेदन कर सकते हैं। 

किस श्रेणी के लिए कितनी सीटें : पुरुष एवं महिला दोनों वर्गों में समान सीटें निर्धारित की गई हैं। प्रत्येक वर्ग में सामान्य वर्ग के लिए 59, अनुसूचित जाति के लिए 28, अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 23, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए 12 और अनुसूचित जनजाति के लिए छह सीटें आरक्षित हैं। यानी 128 पद महिलाओं और 128 पद पुरुषों के लिए विभिन्न श्रेणियों में आरक्षित रखे गए हैं।
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कहां पर कितनी सीटें: जिला आयुर्वेदिक अस्पताल बिलासपुर में 16, हमीरपुर में 16, धर्मशाला में 16, देहरा (कांगड़ा) में 16, कुल्लू में 16, मंडी में 16, रामपुर में 16, नाहन में 16, सोलन में 16, नालागढ़ में 16, ऊना में 16 , चंबा में 20, छोटा शिमला में 24, आयुर्वेदिक कॉलेज एवं अस्पताल पपरोला 36 सीटें हैं।
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