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उपायुक्त के आदेश रद्द: हाईकोर्ट ने कहा- कारदार की कुर्सी पर वंशानुगत दावे को झटका

Wed, 04 Nov 2026 06:12 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।

सार

हाईकोर्ट ने कुल्लू जिले के प्रसिद्ध देवता त्रियुगी नारायण (दियार) मंदिर के कारदार (प्रबंधक) की नियुक्ति से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में उपायुक्त कुल्लू के समीक्षा आदेश को रद्द कर दिया है। 
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अदालत(सांकेतिक)। - फोटो : अमर उजाला
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कुल्लू जिले के प्रसिद्ध देवता त्रियुगी नारायण (दियार) मंदिर के कारदार (प्रबंधक) की नियुक्ति से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में उपायुक्त कुल्लू के समीक्षा आदेश को रद्द कर दिया है। न्यायाधीश संदीप शर्मा की एकल पीठ ने याचिकाकर्ताओं करम चंद और अन्य की याचिका को स्वीकार करते हुए यह फैसला सुनाया। मंदिर के पुराने कारदार पुरुषोत्तम राम को वित्तीय गड़बड़ी और अविश्वास के चलते आरोप के चलते 2017 में पद से हटा दिया गया। बाद में उनकी मृत्यु हो गई। पुरुषोत्तम राम के बेटे कृष्ण बलदेव ने कारदार पद पर वंशानुगत दावा पेश किया। उपायुक्त कुल्लू ने पहले आदेश दिया था कि देवता के हारियानों की आम बैठक बुलाकर इस दावे पर उनकी आम सहमति ली जाए।

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इस बीच कृष्ण बलदेव ने पुनर्विचार याचिका दायर की, इसके बाद डीसी कुल्लू ने अपने पुराने आदेश को बदलते हुए सीधे तौर पर उन्हें वंशानुगत आधार पर कारदार नियुक्त करने का फैसला सुना दिया और बैठक रद्द कर दी। हाईकोर्ट ने कहा कि मंदिर के पारंपरिक दस्तावेज के अनुसार यदि किसी कारदार को अविश्वास या गड़बड़ी के कारण पद से हटाया गया हो, तो उसके कानूनी वारिस सीधे तौर पर वंशानुगत अधिकार का दावा नहीं कर सकते। ऐसी स्थिति में बहुमत की राय और आम सहमति लेना जरूरी है। अदालत ने यह भी पाया कि डीसी ने इस समीक्षा आदेश को पारित करने के लिए न तो सभी पक्षों (जैसे मंदिर समिति के प्रधान) को सुनवाई का मौका दिया और न ही उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया। हाईकोर्ट ने डीसी कुल्लू को आदेश दिया है कि वह चार सप्ताह के भीतर हारियानों की बैठक बुलाने की प्रक्रिया को पूरा करें।
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