रजिस्ट्रार सहकारी समिति आरके प्रुथी ने बताया कि सहकारिता एक्ट 1972 में बदलाव और सहकारिता आंदोलन को मजबूत बनाने के लिए सहकारी सभाओं के सदस्य अपने सुझाव registrarecooperativehp@gmail.com पर भेज सकते हैं। 15 दिनों के बाद इन सुझावों पर विस्तृत चर्चा के बाद रणनीति में शामिल किया जाएगा। 30 सितंबर तक अभी आडिट करने को कहा गया है लेकिन कई समितियां तय समय में आडिट नहीं करती हैं। ऐसे में एक्ट में बदलाव किया जाएगा कि अगर कोई सभा ऑडिटर नियुक्ति नहीं करती है तो सहायक पंजीयक सीधे ऑडिटर नियुक्त करेगा। इसके अलावा 31 मार्च 2025 तक सभी सभाओं को अपने जनरल हाउस आयोजित करने और 15 अप्रैल 2025 तक ऑडिटर नियुक्त करने को कहा है। उन्होंने कहा कि इन प्रावधानों को नये कानून में शामिल किया जाएगा।
हिमफेड, वूल फेड, मिल्क फेड पर शिकंजा कसने के निर्देश
सम्मेलन में हिमफेड, वूल फेड, मिल्क फेड जैसी फेडरेशन के शामिल नहीं होने पर उपमुख्यमंत्री ने चिंता जताई। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन फेडरेशन पर शिकंजा कसा जाए। इसके साथ ही निजी और सरकारी बैंकों के प्रतिनिधियों को भी इस सम्मेलन में आना चाहिए। उन्होंने कहा कि बैंकों का आधार सहकारिता समितियां ही है।