फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

शिमला: सीएम सुक्खू बोले- हिमाचल को 2030 तक हेल्थ सेक्टर में देश का नंबर एक राज्य बनाने का लक्ष्य

Fri, 23 Oct 2026 08:38 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।

सार

मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में पहले जहां करीब 35 प्रतिशत स्टाफ उपलब्ध था, वहीं अब इसे बढ़ाकर लगभग 65 प्रतिशत तक पहुंचाया गया है। सरकार का लक्ष्य 31 मार्च 2027 तक मेडिकल कॉलेजों में स्टाफ की उपलब्धता 100 प्रतिशत करना है।
विज्ञापन
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने शिमला में की पत्रकार वार्ता। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए सरकार ने बड़े स्तर पर काम किया है। मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में पहले जहां करीब 35 प्रतिशत स्टाफ उपलब्ध था, वहीं अब इसे बढ़ाकर लगभग 65 प्रतिशत तक पहुंचाया गया है। सरकार का लक्ष्य 31 मार्च 2027 तक मेडिकल कॉलेजों में स्टाफ की उपलब्धता 100 प्रतिशत करना है। शुक्रवार को राज्य सचिवालय में प्रेसवार्ता के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य, शिक्षा, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक सुधार सरकार की पांच प्राथमिकताएं रही हैं। स्वास्थ्य संस्थानों में पुरानी मशीनों को बदलकर आधुनिक तकनीक से लैस उपकरण लगाए गए हैं।

विज्ञापन
Trending Videos

सरकार ने अपने संसाधनों से नई मशीनरी खरीदी है, जिससे मरीजों को बेहतर उपचार मिल रहा है। उन्होंने दावा किया कि हिमाचल प्रदेश में अब एम्स स्तर की स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं। मेडिकल कॉलेजों में सीटें बढ़ाने के साथ आदर्श स्वास्थ्य संस्थानों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्तियां भी की गई हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में रोबोटिक सर्जरी की सुविधा शुरू करना स्वास्थ्य क्षेत्र की बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने दावा किया कि पंजाब, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड में भी ऐसी सुविधा उपलब्ध नहीं है। सुक्खू के अनुसार रोबोटिक सर्जरी पर करीब 1.20 लाख रुपये खर्च आता है, जबकि मरीजों से फिलहाल 30 हजार रुपये लिए जा रहे हैं। सरकार इस राशि को बढ़ाने पर विचार कर रही है। एसआरशिप के तहत मिलने वाली राशि को 65 हजार रुपये से बढ़ाकर 1.30 लाख रुपये किया गया है। सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2030 तक हिमाचल प्रदेश स्वास्थ्य क्षेत्र में देश का नंबर एक राज्य बने।

आर्थिक चुनौतियों के बीच सुधार का दावा
मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि जब कांग्रेस सरकार ने सत्ता संभाली थी, तब प्रदेश पर 76,633 करोड़ रुपये का कर्ज था और करीब 10 हजार करोड़ रुपये की देनदारियां थीं। केंद्र सरकार की ओर से राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) बंद किए जाने से प्रदेश को करीब 3,200 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। बावजूद सरकार आर्थिक चुनौतियों से निपटने और प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। एक बार पांच दिन के लिए ट्रेजरी बंद करना भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा था। उन्होंने दावा किया कि यदि आरडीजी बंद नहीं होती तो हिमाचल प्रदेश इसी साल आत्मनिर्भर बनने की स्थिति में पहुंच जाता। सुक्खू ने कहा कि आर्थिक चुनौतियों के बावजूद कांग्रेस सरकार अपने सभी चुनावी वादे पूरे करेगी।

दो-तीन करोड़ खर्च कर 100 करोड़ से अधिक का लाभ मिलने का दावा
मुख्यमंत्री ने वाइल्ड फ्लावर हॉल होटल, जेएसडब्ल्यू और किशाऊ बांध से जुड़े मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार ने कानूनी लड़ाई लड़कर हिमाचल प्रदेश के हितों की रक्षा की है। भाजपा सरकार पर वकीलों के लिए करोड़ों रुपये खर्च करने के आरोप लगाती रही है, लेकिन सरकार ने दो से तीन करोड़ रुपये खर्च कर 100 करोड़ रुपये से अधिक का लाभ हासिल किया है। सुक्खू ने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ बैठक के दौरान जब उन्हें लगा कि हिमाचल के हितों की अनदेखी हो रही है, तो उन्होंने विरोध जताया और बैठक से उठकर जाने तक की बात कही। इसके बाद हिमाचल प्रदेश की शर्तों को स्वीकार किया गया।
विज्ञापन

बीबीएमबी के मुद्दे पर भी लड़ाई जारी रहेगी
मुख्यमंत्री ने कहा कि भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) से जुड़े मामले में भी प्रदेश सरकार अपने अधिकारों की लड़ाई जारी रखेगी। इस मामले में पंजाब की ओर से कुछ आनाकानी की जा रही है, लेकिन सरकार हिमाचल के हितों की रक्षा के लिए प्रयास जारी रखेगी। स्वास्थ्य मंत्री कर्नल धनीराम शांडिल और पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह भी मौजूद रहे।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें