कहा कि घास का प्रयोग पूरे विश्व में भूस्खलन के लिहाज से संवेदनशील स्थानों, राजमार्ग तटबंधों और नदी के किनारों पर किया जा रहा है। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने वेटिवर फाउंडेशन सीआरएसआई तमिलनाडु के सहयोग से भूस्खलन से निपटने के लिए परियोजना शुरू की है। योजना में प्राधिकरण ने सीआरएसआई से वेटिवर नर्सरी उपलब्ध करवाने का आग्रह किया है ताकि 2025 के मानसून सीजन से पहले पर्याप्त मात्रा में पौधे उपलब्ध हो सके। सीआरएसआई ने 1,000 वेटिवर घास के पौधे निःशुल्क उपलब्ध करवाए हैं और इन पौधों को कृषि विभाग के सहयोग से सोलन जिले के बेरटी में स्थापित नर्सरी में लगाया गया है।
पानी के बहाव को कम कर देती है घास
यह घास एक प्राकृतिक अवरोधक के रूप में कार्य करते हुए पानी के बहाव को धीमा कर देती है और विशेषकर खड़ी ढलानों पर भूमि कटाव को रोकती है। पंक्तियों में लगाए जाने पर वेटिवर घास एक दीवार की तरह काम करती है। इसकी जड़ें अतिरिक्त पानी को सोख लेती हैं और मिट्टी में पानी की मात्रा को कम करती है। इससे भूस्खलन की संभावनाएं कम हो जाती हैं।