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CM Sukhvinder Singh Sukhu: 'प्राकृतिक खेती के उत्पादों को एमएसपी प्रदान करने वाला पहला राज्य बना हिमाचल'

Fri, 30 Aug 2024 08:09 PM IST
अंकेश डोगरा अमर उजाला ब्यूरो, शिमला

सार

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि हिमाचल प्राकृतिक खेती के माध्यम से उगाए गए उत्पादों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य प्रदान करने वाला देश का पहला राज्य है। 
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मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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फ्रांस के राष्ट्रीय कृषि, खाद्य एवं पर्यावरण अनुसंधान संस्थान के चार वैज्ञानिकों के प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू से भेंट की। एलआईएसआईएस के उपनिदेशक प्रो. एलिसन मैरी लोकोंटो के नेतृत्व में टीम में शोधकर्ता प्रो. मिरेइल मैट, डॉ. एवलिन लोस्टे और डॉ. रेनी वैन डिस शामिल हैं। वह प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में हुई प्रगति के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए हिमाचल प्रदेश के दौरे पर आए हैं।

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बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में अग्रणी राज्य है। हिमाचल प्राकृतिक खेती के माध्यम से उगाए गए उत्पादों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य प्रदान करने वाला देश का पहला राज्य है। प्रदेश में गेहूं 40 रुपये प्रति किलोग्राम और मक्का 30 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से खरीदा जा रहा है। इसके अतिरिक्त, गाय का दूध 45 रुपये प्रति लीटर और भैंस का दूध 55 रुपये प्रति लीटर की दर से खरीदा जा रहा है। उन्होंने प्राकृतिक खेती में उत्पाद प्रमाणन के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सीटारा प्रमाणन प्रणाली शुरू की गई है, जिसे किसानों को उचित मूल्य दिलाने के लिए लागू किया जा रहा है।

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फ्रांसीसी वैज्ञानिकों ने राज्यपाल को एक्रोपिक्स परियोजना की दी जानकारी
प्रो. एलिसन मैरी लोकोंटो के नेतृत्व में आईएनआरएई के चार फ्रांसीसी वैज्ञानिकों के एक दल ने शुक्रवार को राजभवन शिमला में राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल से भेंट कर एक्रोपिक्स परियोजना पर चर्चा की। इसका उद्देश्य प्राकृतिक खेती जैसी पारिस्थितिक कृषि पद्धति को बढ़ावा देना है। यह दल सोलन जिले के नौणी स्थित डॉ. वाईएस परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय में अभिनव कार्यों की संभावनाएं तलाशने के लिए तीन सप्ताह के दौरे पर है। राज्यपाल ने प्राकृतिक खेती के प्रति हिमाचल प्रदेश के किसानों में उत्साह पर प्रकाश डालते हुए बताया कि प्रदेश के 1.5 लाख से अधिक किसान इस पद्धति को अपना चुके हैं। उन्होंने प्रमाणन और स्थिरता पहलों तथा कृषि पारिस्थितिकी में विश्वविद्यालय के अग्रणी प्रयासों की प्रशंसा की। यूरोपीय आयोग की ओर से वित्त पोषित एक्रोपिक्स परियोजना में 13 देशों के 15 सदस्य शामिल हैं। फ्रांसीसी वैज्ञानिक अपने इस दौरे के दौरान विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के साथ बातचीत तथा खेतों का निरीक्षण करेंगे। वे वैश्विक स्तर पर प्राकृतिक खेती पद्धति को लागू करने के बारे में जानकारी हासिल करने के लिए प्रगतिशील किसानों और प्राकृतिक खेती कंपनियों के साथ भी बातचीत करेंगे। 
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