भरमौर(चंबा)। जनजातीय क्षेत्र भरमौर के बाशिंदों को बालन (जलाने के लिए लकड़ी) के लिए 300 रुपये प्रति क्विंटल अधिक दाम चुकता करने होंगे। बालन के दाम में होने वाली बढ़ोतरी को लेकर अब ग्रामीणों ने भी सवाल उठाने आरंभ कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सर्दियों में जनजातीय क्षेत्र भरमौर में कड़ाके की ठंड पड़ती है। बावजूद इसके सरकार की ओर से मिलने वाले अनुदान को बंद कर दिए जाने से अब ग्रामीणों को जलाने के लिए बालन खरीदने के लिए अधिक शुल्क अदा करना पड़ेगा। जिस कारण ग्रामीणों में सरकार और कारपोरेशन प्रबंधन के प्रति काफी रोष है।
वन विभाग से जानकारी अनुसार वन विभाग की ओर से 125 क्विंटल बालन संबंधी डिमांड वन निगम को दी गई है। इसके तहत आगामी एक या दो दिनों में भरमौर में बालन पहुंचेंगी। सूत्र खुलासा करते है कि भरमौर में आग सेंकने समेत अन्य कार्यों के लिए ग्रामीण वन डिपो से ही बालन खरीदते हैं। पूर्व में बालन प्रति क्विंटल 585 रुपये मिलती रही है। जो कि इस वर्ष अब 885 रुपये प्रति क्विंटल मिलेगी। बालन के प्रति क्विंटल 300 रुपये बढ़ना ग्रामीणों के गले नहीं उतर रहा है। जिले के जंगलों में लाखों-करोड़ों की वन संपदा धू-धूल जलती रहती है। उसे संग्रहित कर लोगों को प्रदान करने के बजाए ग्रामीणों को मिलने वाली बालन के दाम बढ़ा कर उनपर बोझ बढ़ाने का काम किया है।
वन रेंज अधिकारी तपेंद्र सिंह नेगी ने बताया कि 125 क्विंटल बालन की डिमांड दी जा चुकी हैं। जो कि, एक-दो दिन में भरमौर पहुंच जाएंगी। सरकार के निर्देशानुसार ही बालन के दाम रहेंगे।