पांगी (चंबा)। जनजातीय क्षेत्र पांगी के लोग 610 रुपये प्रति क्विंटल में मिलने वाली बालन की लकड़ी को 1,488 रुपये में खरीद रहे हैं। क्योंकि प्रदेश सरकार ने बालन की लकड़ी में दी जाने वाली सब्सिडी को समाप्त कर दिया है। इससे पहले जनजातीय क्षेत्र के लोगों को बालन की लकड़ी के लिए ट्रांसपोटेशन, लोडिंग और अनलोडिंग सब्सिडी मिलती थी। इसके चलते इन लोगों को यह लकड़ी 610 रुपये प्रति क्विंटल की दर से पांगी में उपलब्ध होती थी। लेकिन एक साल से पांगी घाटी के लोग वन विभाग से महंगी दरों पर इस लकड़ी को खरीद रहे हैं। सरकार के इस फैसले से जनजातीय क्षेत्र पांगी की 19 पंचायतों में रहने वाली 30,000 आबादी नाखुश है। क्योंकि जिला के सबसे दुर्गम क्षेत्र में जीवन यापन करना पहले ही मुश्किल था। लेकिन अब उन्हें सर्दी में आग को सहारा लेने के लिए भी दोगुना अधिक दाम चुकाने पड़ेंगे।
पांगी वासियों में मान सिंह, देवराज, त्रिलोक ठाकुर, पवन कुमार, सुरेश, दीपक, मनोज, अशोक और मदन जरयाल ने बताया कि पांगी घाटी में जहां सरकार को मूलभूत सुविधाएं सस्ती दरों पर उपलब्ध करवानी चाहिए। लेकिन मौजूदा सरकार जनजातीय क्षेत्र के लोगों को पहले से मिली रही सुविधा को भी बंद कर रही है। इससे लगता है कि सरकार को जनजातीय क्षेत्र के लोगों से कोई भी लेना-देना नहीं है। सर्दी के मौसम में पांगी घाटी में तीन महीने तक बर्फ रहती है। ऐसे में कई गांवों में बिजली की आपूर्ति भी बंद रहती है। लोगों को ठंड से बचने के लिए घरों में बालन की लकड़ी का ही सहारा लेना पड़ता है। ऐसे में बालन लकड़ी महंगी होने से ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ गई है।
वन मंडल अधिकारी पांगी डीएस डढवाल ने बताया कि सरकार की तरफ से बालन लकड़ी पर दी जाने वाली सब्सिडी खत्म कर दी गई है। इसके चलते बालन लकड़ी के दाम बढ़े हैं।