चंबा। दिन: सोमवार। स्थान: चंबा मेडिकल कॉलेज। समय सुबह 9:30 बजे। यहां अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए गर्भवती महिलाओं की भीड़ जुटी है। अल्ट्रासाउंड से पूर्व शरीर में लगाने वाला जेल खत्म हो चुका है। इसकी वजह से गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए इंतजार करने को कहा जा रहा है। परेशान महिलाएं यहां-वहां बैठकर समय व्यतीत कर रही हैं।
तीमारदारों का गुस्सा भड़क रहा है। 9:45 बजे तीमारदार अपनी समस्या को लेकर चिकित्सा अधीक्षक के पास पहुंचते हैं। इसके बाद वह मरीजों की समस्या का समाधान करने के लिए जेल उपलब्ध करवाते हैं। सुबह 10:00 बजे महिलाओं के अल्ट्रासाउंड शुरू होते हैं। 10:30 बजे मेडिसिन ओपीडी के बाहर मरीजों की लंबी कतार लग जाती है। ओपीडी में मरीजों को देखने के लिए एक ही विशेषज्ञ बैठा है। इसकी वजह से मरीजों को अपनी जांच करवाने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।
लाइन में सबसे पीछे खड़े मरीज थक हारकर फर्श पर ही बैठे जाते हैं। गायनी ओपीडी में महिलाएं अपने रूटीन चेकअप के लिए खड़ी हैं। ओपीडी में कोई महिला विशेषज्ञ मौजूद नहीं है। मेडिकल अफसर और एमबीबीएस प्रशिक्षु महिलाओं के स्वास्थ्य की जांच कर रहे हैं। बाल रोग ओपीडी में बीमार बच्चों की कतारें लगी हैं। अभिभावक अपने बच्चों को गोद में उठाकर बारी आने का इंतजार कर रहे हैं। इसी तरह हड्डी और नेत्र ओपीडी के बाहर भी मरीजों की भीड़ लगी है।
मेडिकल कॉलेज चंबा के कार्यकारी चिकित्सा अधीक्षक डॉ. देवेंद्र कुमार ने बताया कि जेल खत्म होने की वजह से अल्ट्रासाउंड करने में देरी हुई। कुछ ही देर में जेल उपलब्ध करवा दिया गया था। ओपीडी के बाहर मरीजों की भीड़ कम करने के लिए प्रबंधन हर संभव प्रयास कर रहा है। डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए सरकार को पत्र भेजा गया है।