रंगमहल में चंबा शॉल का प्रशिक्षण लेती महिलाएं: संवाद
रंगमहल चंबा में महिलाओं को दिया जा रहा पारंपरिक कलाओं में प्रशिक्षण
संवाद न्यूज एजेसी
चंबा। चंबा जिले की पारंपरिक हस्तकला चंबा रूमाल और चंबा शॉल आज न केवल राज्य की सांस्कृतिक पहचान बन चुके हैं, बल्कि ये ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता का एक सशक्त माध्यम भी बन रहे हैं। रंगमहल चंबा में महिलाओं को इन पारंपरिक कलाओं में प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
प्रशिक्षण प्राप्त कर महिलाएं घर बैठे स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ा रही हैं। खास बात यह है कि चंबा रूमाल जो अपनी बारीक कढ़ाई और धार्मिक-पौराणिक चित्रों के लिए प्रसिद्ध है, अब राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में भी इसकी मांग है। शिक्षा के साथ-साथ यह पहल महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बना रही है। कई प्रशिक्षित महिलाएं अब स्वयं सहायता समूह बनाकर इन उत्पादों को ऑनलाइन और आफलाइन स्थानीय बाजारों में बेच रही हैं, जिससे उन्हें अच्छा लाभ हो रहा है। सरकारी योजनाओं और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के चलते चंबा की यह पारंपरिक कला अब ग्रामीण जीवन की दिशा और दशा दोनों बदल रही है। यह पहल न केवल महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रही है, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत को भी जीवित रखे हुए है। हैंडलूम हैंडीक्राफ्ट कारपोरेशन चंबा के कार्यवाहक प्रभारी शीतल कुमार ने कहा कि भविष्य मेें भी इस तरह के प्रशिक्षण दिए जाएंगे।