चंबा। मुख्य चिकित्सा अधिकारी के सभागार में राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन पर प्रशिक्षण कार्यक्रम हुआ। इसकी अध्यक्षता मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. विशाल महाजन ने की।
जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जालम भारद्वाज ने बताया कि प्रशिक्षण का उद्देश्य टीबी के निदान में होने वाली देरी को कम करना है। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय संस्था ने प्रदेश में टीफा प्रोजेक्ट का शुभारंभ 3 जुलाई को शिमला से किया है। इसी प्रोजेक्ट के तहत चंबा जिले के लिए पहले प्रशिक्षण कार्यक्रम करवाया गया। बाद में खंड स्तर पर प्रशिक्षण दिया जाएगा।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. हरित पुरी ने कहा कि टीबी रोगियों की पहचान में देरी के कारणों में स्वस्थ के प्रति जागरूकता की कमी, देरी से इलाज करवाना, टीबी रोगियों से भेदभाव मुख्य हैं। डॉ. पुरी ने बताया कि टीबी का संक्रमण पहले नंबर पर है। इस रोग का एक चौथाई हिस्सा भारत में रहता है I सरकार के निर्धारित मानकों के अनुसार हिमाचल को टीबी मुक्त बनाना है। आयुष विभाग, दवाई बिक्रेता, ग्रामीण चिकित्सकों को मिल कर काम करना है। कफ सिरप को ऑनलाइन माध्यम से रोगी को देने पर एप से निगरानी रखी जाएगी। यदि रोगी ठीक नहीं होता है तो स्वास्थ्य विभाग की टीम घर जाकर थूक के नमूने एकत्रित कर जांच के लिए भेजेगी। ड्रग इंस्पेक्टर लवली सिंह ने दवाई विक्रेताओं को निर्देश दिए कि जो कोई भी रोगी कफ सिरप लेता है, उसकी एंट्री एप में ऑनलाइन डाली जाए। कार्यक्रम में सभी खंड स्वास्थ्य अधिकारी, विश्व स्वास्थ्य संगठन से डॉ. आत्मिका, डॉ. स्नेहा, डॉ. आत्मिका, ड्रग इंस्पेक्टर, प्रोजेक्ट मैनेजर प्रवीण चौहान, दवाई एसोसिएशन के प्रेजिडेंट प्रशांत पुरी और उपाध्यक्ष साहिल ढल (दवाई विक्रेता) के साथ जिले भर से लोग मौजूद रहे।