कोई साधन नहीं बचा तो छोटी-छोटी चीजों पर कर वसूलने लगी सरकार
लोग बोले- आने वाले समय में आर्थिक आपातकाल के बने हालात, जनता पहले ही झेल रही है महंगाई की मार
कहा - प्रति यूनिट बिजली पर दूध और पर्यावरण उपकर के विधेयक को वापस ले सरकार
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। जनता पहले ही महंगाई की मार से त्रस्त है, ऊपर से सरकार जरूरी चीजों पर भी टैक्स लगा रही है। इससे निर्धन और मध्यम वर्गीय परिवारों का बजट डांवाडोल हो गया है। गृहिणियों के लिए घर चलाना मुश्किल हो रहा है। कर्मचारियों-पेंशनरों को समय पर वेतन-पेंशन नहीं मिल रही है। लोगों ने कहा कि सरकार के पास अब कर लगाने के लिए कोई साधन नहीं बचा तो छोटी-छोटी चीजों पर टैक्स लगाना शुरू कर दिया है। इससे आने वाले समय में प्रदेश में आर्थिक आपातकाल की स्थिति बनती दिख रही है। लोगों ने कहा कि प्रदेश सरकार अब दूध और पर्यावरण उपकर के रूप में प्रति यूनिट बिजली महंगी कर लोगों को लूटने का काम कर रही है। सरकार को इस विधेयक को लेकर पुन: विचार करना चाहिए।
परिचर्चा
महंगाई डायन ने पहले ही लोगों की मुसीबतें बढ़ा रखीं हैं, उस पर अब सरकार का नया प्लान लोगों पर भारी पड़ने वाला है। सरकार की यह सीधे तौर पर दमनकारी नीति है। इससे हर वर्ग त्रस्त होगा। - अंबिका शर्मा
किसी वस्तु को बढ़ावा देने के लिए लोगों को अतिरिक्त बोझ डालने संबंधी सरकार की सोच गलत है। सरकार को इस निर्णय को लेकर पुन: विचार करना चाहिए, जिससे लोगों की जेबों पर अतिरिक्त बोझ न पड़े। - शमशाद
महंगाई की मार से हर वर्ग परेशान है। दालों से लेकर हर खाद्य सामग्री के दाम पहले से ही आसमान छू रहे हैं। ऐसे में सरकार की ओर से इस प्रकार के लिए जाने वाले निर्णय जनविरोधी ही प्रतीत हो रहे हैं। - आरती देवी
कर्मचारियों-पेंशनरों को समय पर वेतन-पेंशन नहीं मिल रही है। अब बिजली की यूनिट महंगी कर सरकार लोगों को परेशान करने पर तुल गई है। यही हाल रहा तो प्रदेश में आर्थिक आपातकाल तक लग सकता है। - रफीका बेगम