चंबा। शहर में लावारिस कुत्तों का आतंक एक बार फिर सिर उठा रहा है। सड़कों और गलियों में झुंड बनाकर घूमते कुत्ते लोगों पर झपट रहे हैं, जिससे नागरिक दहशत में हैं। एक साल से नगर परिषद और पशुपालन विभाग का संयुक्त टीकाकरण अभियान ठप पड़ा है, जिसके चलते कुत्तों की संख्या तेजी से बढ़ी है।
कुछ महीनों तक राहत रहने के बाद अब बाजार और रिहायशी इलाकों में फिर से कुत्तों का जमावड़ा दिखने लगा है। कई जगह बच्चों और राहगीरों पर हमले की घटनाएं भी सामने आई हैं।
शाम होते ही गलियों में कुत्तों के झुंड घूमते हैं। कई बार बच्चे डर के मारे स्कूल जाने से कतराते हैं। नगर परिषद और प्रशासन को जल्द कार्रवाई करनी चाहिए। साहिल कुमार, स्थानीय निवासी
टीकाकरण अभियान से पहले कुछ राहत मिली थी, मगर अब हालात फिर खराब हो गए हैं। ग्राहकों को दुकान तक आने में भी डर लगता है। मुकेश, व्यापारी
ज्यादातर लावारिस कुत्ते छोटे बच्चों पर झपटते हैं या पीछे दौड़ते हैं। गलियों में तो हालात बहुत खराब हैं। प्रेम चंद, निवासी
गलियों में लोग खाना फेंक देते हैं, जहां ये कुत्ते झुंड में आते हैं और वहां से गुजरने वालों पर हमला कर देते हैं। टीकाकरण अभियान बहुत जरूरी है। त्रिलोक, स्थानीय निवासी
पशुपालन विभाग चंबा के उपनिदेशक डॉ. राकेश भांगालिया से सवाल-जवाब
प्रश्न : विभाग कुत्तों का टीकाकरण अभियान क्यों नहीं चला रहा है। इसमें कितना शुल्क है।
उत्तर : विभाग के पास सीमित संसाधन हैं। लावारिस कुत्तों का टीकाकरण निशुल्क किया जा सकता है।
प्रश्न : आगे क्या अभियान चलाने की संभावना है।उत्तर : कुत्तों को पकड़ने के लिए डॉग कैचर और फील्ड टीम की जरूरत होगी। यदि नगर परिषद सहयोग करे तो संयुक्त अभियान फिर से शुरू किया जा सकता है।
नगर परिषद अध्यक्ष नीलम नैयर से सवाल-जवाब
प्रश्न : लावारिस कुत्तों के टीकाकण अभियान को लेकर क्या योजना है।
उत्तर : पिछले वर्ष डॉग कैचर बुलाकर अभियान चलाया था। अब दोबारा अभियान चलाने के लिए उचित प्रयास किए जा रहे हैं।