रखरखाव न होने से बंद हैं बस स्टैंड, सुल्तानपुर और जुलाहकड़ी मार्ग में स्ट्रीट लाइटें
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। भरमौर-पठानकोट हाईवे और शहर में हजारों रुपये की लागत से लगाई गईं ट्रैफिक लाइटें वर्षों से बंद पड़ी हैं। आलम यह है कि न तो लाल बत्ती रुकने का संकेत देती है, न हरी चलने का और न पीली सावधानी का इशारा करती है।
ये लाइटें सालों से केवल खंभों पर लगे बेकार डिब्बों जैसी नजर आती हैं। ये चंबा बस स्टैंड, सुल्तानपुर और जुलाहकड़ी मार्ग के किनारे लगाई गई थीं। कुछ समय के लिए लाइटें सुचारू रूप से कार्य करती रहीं लेकिन सही रखरखाव न होने के कारण इनकी हालत खस्ता होती चली गई। अब ये बंद पड़ी हैं। पुलिस विभाग ने हाईवे समेत शहर के इर्द-गिर्द सीसीटीवी कैमरे स्थापित और संचालित करवा अपनी जिम्मेवारी से इतिश्री कर ली है। ट्रैफिक लाइट गुल रहने से वाहन चालक भी इनके नियमों को करीब-करीब भूल ही चुके हैं। इसका खामियाजा वाहन चालकों को दूसरे राज्यों में पहुंचने पर भुगतना पड़ता है। प्रबुद्धजन की मानें तो ट्रैफिक लाइट सुचारू होने से शहर के मुख्य जगहों पर लगने वाले जाम से भी छुटकारा होगा। साथ ही दुर्घटनाओं पर भी अंकुश लगेगा।
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जिले में ट्रैफिक लाइट खामोश होने से कई बार बाहरी जिलों, राज्यों में जाने पर उन्हें ट्रैफिक लाइटों की याद ही नहीं रहती है। इससे उन्हें भारी भरकम चालान तक भुगतना पड़ जाता है। - अनवर, शहरवासी
सरकारी पैसे खर्च कर टैफिक लाइटें लगाई गई हैं लेकिन इनका उपयोग नहीं हो रहा है। वर्तमान में महज चौराहों पर सीसीटीवी कैमरे लगा चालान काटने तक ही व्यवस्था चल रही है। - अजय कुमार, शहरवासी
ट्रैफिक लाइटें लगाने के नाम पर भारी बजट खर्च किया गया तो उन्हें चालू रखने की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए लेकिन जिला प्रशासन से लेकर ट्रैफिक पुलिस इस दिशा में ठोस कदम उठा रही है। - उमेश कुमार, शहरवासी
ट्रैफिक लाइटें सुचारू होने से जाम से छुटकारा मिलने समेत दुर्घटनाओं पर भी रोक लग सकती है। पुलिस विभाग को इनकी मरम्मत करवा इन्हें सुचारू करवाना चाहिए। - करण कुमार, चंबा निवासी
सालों पहले ट्रैफिक लाइटें लगाई गई हैं। इनकी मरम्मत करवाने के लिए अब जिला प्रशासन से आग्रह कर बजट की डिमांड की जाएगी। - अभिषेक यादव, पुलिस अधीक्षक चंबा