शहर के लोगों ने लगाया दसवीं पास महिलाओं से सर्वे में लगाने का आरोप
बोले- बाहरी माप और सीमित जानकारी के आधार पर तैयार किए आंकड़े
सर्वे के दौरान नहीं जांचे जरूरी दस्तावेज, संपत्ति मालिक भी नहीं किए शामिल
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। शहर में इन दिनों गृहकर सर्वे चर्चा और विवाद का विषय बना हुआ है। 11 वार्डों में हाल ही में किए गए सर्वे के बाद कई मकान मालिकों ने प्रक्रिया की पारदर्शिता और सटीकता पर सवाल उठाए हैं।
आरोप है कि सर्वे के दौरान न तो संपत्ति मालिकों को शामिल किया गया और न ही आवश्यक दस्तावेजों की जांच की गई। बाहरी माप और सीमित जानकारी के आधार पर तैयार किए गए आंकड़ों ने अब कर निर्धारण को लेकर असंतोष और भ्रम की स्थिति पैदा कर दी है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि सर्वे प्रक्रिया पूरी तरह अनुचित और अव्यवस्थित थी। मकान मालिकों ने कहा कि सर्वे में दसवीं पास महिलाएं शामिल थीं। इन्हें गृहकर के सही आकलन की जानकारी तक नहीं थी। मकान मालिकों को सर्वे के दौरान शामिल नहीं किया गया। इससे दर्ज किए गए आंकड़ों की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं। कई मकानों में मालिक घर में नहीं थे तो उन्हें जानकारी ही नहीं है कि उनके घरों का भी सर्वे हुआ है। अब गृहकर अधिक आने पर लोगों में विवाद बढ़ रहा है।
नगर परिषद की कनिष्ठ अभियंता नीतिका ठाकुर का कहना है कि निदेशालय के निर्देश के अनुसार ही महिलाओं को सर्वे के लिए भेजा गया था। उन्होंने ही महिलाओं को सर्वे करने के बारे में बताया था।
मेरे मकान का माप गलत दर्ज किया है। सर्वे टीम के पास न पूरा रिकॉर्ड था, न ही हमें शामिल किया। पूरे सर्वे की जांच की जाए। जिन संपत्तियों का गलत आकलन हुआ है, उन्हें सुधारने का मौका दिया जाए। - जितेंद्र सूर्या
सर्वे करने वाली महिलाओं ने खुद ही कहा है कि उन्हें पूरी प्रक्रिया की जानकारी नहीं है। ऐसे में सही गृह कर का निर्धारण कैसे होगा। इस कारण ही मकान मालिकों का गृहकर अधिक आ रहा है। - निखिल
अगर यह सर्वे निदेशालय के निर्देश पर हुआ है तो इसकी जिम्मेदारी उनकी टीम को लेनी चाहिए थी। स्थानीय महिलाओं को इस तरह का तकनीकी काम नहीं सौंपा जाना चाहिए। - संजय कुमार
सर्वे के दौरान हमसे कोई दस्तावेज नहीं मांगे गए। केवल बाहरी माप के आधार पर डाटा दर्ज किया गया। इससे भविष्य में कर निर्धारण गलत होगा। हमें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। - सुरेंद्रा कुमारी