चंबा। मेडिकल काउंसिल (एमसीआई)के निरीक्षण के साथ ही चंबा मेडिकल कॉलेज के महत्वपूर्ण विभागों से विशेषज्ञ डॉक्टर गायब हो गए हैं। प्रबंधन के लिए अब इन विभागों को चलाना मुश्किल हो रहा है। रोजाना मेडिकल कॉलेज से मरीजों को टांडा रेफर किया जा रहा है, इनमें ज्यादातर गर्भवती महिलाएं शामिल हैं।
मेडिकल कॉलेज में मौजूदा समय में कोई भी स्त्री रोग विशेषज्ञ नहीं है।
ब्लड प्रेशर ज्यादा होने पर चिकित्सक प्रसव करवाने से इंकार कर देते हैं। ऐसे मामलों में गर्भवती महिलाओं को सीधे टांडा भेज दिया जाता है। जहां पर गर्भवती का नॉर्मल प्रसव होता है। ऐसे कई मामले चंबा में सामने आ चुके हैं। इसकेे अलावा शिशु रोग विभाग दो विशेषज्ञों के सहारे चलाया जा रहा है। दोनों विशेषज्ञ सुबह वार्ड में उपचाराधीन मरीजों की जांच करने की वजह से ओपीडी देरी से पहुंचते हैं। इसकी वजह से मरीजों को भारी परेशानी उठानी पड़ती है। यही हाल मेडिसिन विभाग का है। मरीजों को विशेषज्ञ से अपनी जांच करवाने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है। सुबह से लेकर शाम तक ओपीडी के बाहर लंबी लाइनें लगी रहती हैं। कैंसर रोग ओपीडी में तैनात चिकित्सक चंबा से जा चुके हैं। इसकी वजह से वहां ताला लटका पड़ा है। सर्जरी विभाग में भी तीन विशेषज्ञ हैं, जिन्हें वार्ड, ओपीडी और मरीजों के ऑपरेशन का जिम्मा संभालना मुश्किल हो रहा है। नेत्र विभाग से भी विशेषज्ञ नहीं हैं। टीबी रोग विभाग में भी एक विशेषज्ञ है। जो मौजूदा समय में चिकित्सा अधीक्षक का कार्यभार भी संभाल रहे हैं। कुल मिलाकर मेडिकल कॉलेज में 100 चिकित्सकों की कमी चल रही है। प्रबंधन सरकार को कई बार लिखित रूप से चिकित्सकों के रिक्त पद भरने के लिए अवगत करवा चुका है, लेकिन सरकार ने इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाए हैं। पिछले माह नेशनल मेडिकल काउंलिस के निरीक्षण के लिए सरकार ने चंबा में 35 विशेषज्ञों की तैनाती की थी। निरीक्षण होते ही ये विशेषज्ञ चंबा से गायब हो गए।
-यह बात सही है कि मेडिकल कॉलेज में विशेषज्ञों की भारी कमी है। मौजूदा विशेषज्ञ मरीजों को बेहतर सेवाएं प्रदान करने का हर संभव प्रयास कर रहे हैं। विशेषज्ञों की कमी बारे सरकार को अवगत करवाया दिया गया है। - डॉक्टर रमेश भारती, प्राचार्य चंबा मेडिकल कॉलेज