चंबा। जंगलों से इमारती लकड़ी निकालने में लेटलतीफी करने वाले ठेकेदार का वन विकास निगम के मंडलीय प्रबंधक (डीएम) ने टेंडर रद्द किया था। अब उसी ठेकेदार को निगम के निदेशक कार्यालय ने दोबारा कार्य करने की अनुमति प्रदान कर दी है।
भरमौर वन मंडल के अंतर्गत बट वेई जंगल में 2,238 सूखे पेड़ों को काटने का टेंडर 27 मार्च 2023 को ठेकेदार को आवंटित हुआ था। 30 मार्च 2025 तक इस कार्य को पूर्ण करना अनिवार्य था, लेकिन ठेकेदार 50 प्रतिशत कार्य भी पूरा नहीं कर पाया। इसके चलते वन विकास निगम ने ठेकेदार का टेंडर रद्द करके रिपोर्ट अपने उच्चाधिकारी को भेजी। यह कार्य ठेकेदार को 1.49 करोड़ रुपये की धनराशि का टेंडर आवंटित हुआ था। इसके साथ टुंडा मुंडा डीपीएफ में 1,220 सूखे पेड़ों को काटकर कर उसकी लकड़ी डिपो तक पहुंचाने के लिए ठेकेदार को 93.78 लाख रुपये का टेंडर आवंटित हुआ था। इसे भी ठेकेदार समय पर पूरा नहीं कर पाया। साथ ही चुराह के चंदरोल और खैरना जंगल में दो लॉट के टेंडर रद्द किए हैं। अब यह भी सवाल खड़े हो रहे हैं कि जिस ठेकेदार ने पहले समय पर कार्य पूर्ण नहीं किया, वह अब कैसे यह कार्य समय पर करेगा।
आमतौर पर देखा जाता है कि जब कोई टेंडर रद्द किया जाता है तो उस टेंडर काे दोबारा करवाया जाता है, लेकिन भरमौर वन मंडल में जिस लॉट का टेंडर रद्द किया गया था, उसे ठेकेदार के आवेदन करने पर दोबारा कार्य करने की अनुमति दे दी गई है। यह अनुमति वन विकास निगम के निदेशक कार्यालय से दी गई है।
यदि कोई टेंडर समाप्त अवधि से पहले रद्द किया जाए तो उसे संबंधित ठेकेदार को दोबारा दिया जा सकता है। समय अवधि समाप्त होने के बाद रद्द होने वाले टेंडर को दोबारा ही करवाया जाता है। नितिन पाटिल, निदेशक, वन विकास निगम