चंबा के लक्ष्मीनारायण मंदिर में वर्षों से 1500 रुपये मानदेय पर सेवाएं दे रहे बजंतरी
बोले- रोजाना मिल रहा 50 रुपये मेहनताना, उपायुक्त को ज्ञापन सौंपकर उठाई समस्या
डीसी बोले- तहसीलदार को दिए जांच के आदेश, उसके बाद ही बढ़ा सकते हैं मेहनताना
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। सुबह की पहली आरती से लेकर रात के अंतिम अनुष्ठान तक शहनाई और नगाड़े की गूंज मंदिर परिसर में कभी नहीं थमती लेकिन इन्हें जीवंत रखने वाले दो बजंतरियों की जिंदगी आज भी महज 50 रुपये प्रतिदिन के मानदेय पर अटकी है। धार्मिक परंपरा को वर्षों से निभा रहे इन कलाकारों की आर्थिक हकीकत अब सवाल बनकर प्रशासन के दरवाजे तक पहुंच गई है।
वीबी-जीरामजी में मजदूरों को प्रतिदिन करीब 300 रुपये की दिहाड़ी मिल रही है। चंबा के ऐतिहासिक लक्ष्मीनारायण मंदिर में वर्षों से सेवाएं दे रहे शहनाई और नगाड़ा वादक (बजंतरी) महज 1,500 रुपये मासिक मानदेय पर काम कर रहे हैं। उन्हें प्रतिदिन करीब 50 रुपये के हिसाब से गुजारा करना पड़ रहा है।
मंदिर में 18 से 20 वर्षों से सेवाएं दे रहे जर्मो और मुंशी ने उपायुक्त को ज्ञापन सौंपकर वेतन बढ़ाने की मांग की है। उन्होंने बताया कि वे प्रतिदिन सुबह साढ़े चार से रात नौ बजे तक करीब साढ़े 17 घंटे मंदिर में शहनाई और नगाड़ा बजाते हैं। उन्हें 1,500 रुपये प्रतिमाह मिलते हैं। बजंतरियों ने कहा कि वे दूरस्थ गांव राण डाकघर सराहन (साहो) से प्रतिदिन मंदिर आते हैं। महंगाई के दौर में इतनी कम राशि से परिवार का भरण-पोषण करना संभव नहीं है। वे अनुसूचित जाति वर्ग से संबंध रखते हैं। लंबे समय से आर्थिक तंगी झेल रहे हैं।
वे कई बार संबंधित अधिकारियों के समक्ष वेतन वृद्धि की मांग उठा चुके हैं लेकिन सुनवाई नहीं हुई। उनकी सेवा में किसी प्रकार का अवकाश, अतिरिक्त भत्ता या ओवरटाइम की व्यवस्था नहीं है। प्रतिदिन अपनी जिम्मेदारी निभानी पड़ती है। उन्होंने उपायुक्त से मांग की है कि उनकी सेवा अवधि और आर्थिक स्थिति को देखते हुए उन्हें न्यूनतम दैनिक वेतन के अनुरूप मानदेय दिया जाए। उधर, उपायुक्त मुकेश रेपसवाल ने बताया कि तहसीलदार को जांच के निर्देश जारी किए हैं। उसके बाद ही मेहनताना बढ़ाया जा सकता है।