चंबा में चुवाड़ी की क्षतिग्रस्त सिंचाई कूहल।संवाद
चंबा। जिले के किसान अब धीरे-धीरे धान की खेती करने से हाथ खींच रहे हैं। भीषण गर्मी के चलते नदी-नालों और खड्डों में पानी सूखने से इस प्रकार की नौबत आई है।
जिला चंबा में लगभग 2000 हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती की जाती रही है। वर्तमान समय में नदी-नालों में पानी सूखने से धान की खेती की ओर किसानों का रुझान कम होता जा रहा है। जिले की बात करें तो विकास खंड भटियात और विकास खंड चंबा और मैहला के किसान धान की खेती करते हैं, लेकिन धीरे-धीरे किसानों का रुझान अब इससे कम होता जा रहा है।
पहले विकास खंड चंबा और मैहला में वर्षा पर आधारित क्षेत्रों में भी धान की खेती की जाती थी। अब इन विकास खंडों के केवल सिंचित क्षेत्रों में ही धान की खेती की जाती है। भटियात में धान की कस्तूरी बासमती, तूड़ा बासमती किस्मों के अतिरिक्त हाइब्रिड किस्में और कृषि विश्व विद्यालय पालमपुर की ओर से विकसित धान की किस्में लगाई जाती हैं। पहले कृषि विभाग धान की सुधरी किस्मों का लगभग 140 क्विंटल बीज हर वर्ष किसानों को उपलव्ध करवाता रहा है। यह लगभग 350 हेक्टेयर भूमि में लगाया जाता रहा है। इस वर्ष 120 क्विंटल ही बीज की मांग भेजी गई है। कुछ इलाकों में धान की खेती कम होती जा रही है। इसका कारण पानी की कमी होना है। उधर, कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ. कुलदीप धीमान ने कहा कि पहले की अपेक्षा से कम क्षेत्रों में धान की खेती होने का अंदाजा लगाया जा सकता है।