अमर उजाला में प्रकाशित खबर।संवाद
चंबा। भोज पत्र अवैध तस्करी मामले में वन विभाग की जांच टीम अभी तक मुख्य आरोपियों को नहीं पकड़ पाई है।
15 दिन पहले वन विभाग की टीम ने दो लोगों को भोज पत्र की सात बोरियों के साथ पकड़ा था। रात के अंधेरे में ये आरोपी माल वाहक वाहन में भोज पत्र को छिपाकर ठिकाने पहुंचाने जा रहे थे, लेकिन वन विभाग की सक्रियता के चलते तस्कर माल को ठिकाने तक नहीं पहुंचा पाए। विभागीय टीम ने उन्हें भोज पत्र के साथ पकड़ लिया। आरोपियों से गहनता से पूछताछ की गई तो उन्होंने भोजपत्र बेचने वाले मुख्य आरोपियों के नाम बताए। ये चुराह की ऊंची धारों में रहते हैं। जैसे ही उन्हें पकड़ने के लिए वन विभाग की जांच टीम ज्युरी की ऊंची धार में पहुंची तो उनके आने की खबर मुख्य आरोपियों को पहले ही मिल गई। वह जांच टीम के पहुंचने से पहले ही फरार हो गए। टीम ने उनके संबंध में वार्ड पंच से बातचीत की तो उन्होंने बताया कि ये लोग अपने मवेशियों को साथ लेकर पंजाब की तरफ चले गए हैं। अब वह कब वापस आएंगे, इसका कोई पता नहीं है। ऐसे में टीम को निराश होकर लौटना पड़ा।
जिस प्रकार से मेपल मामले के तार चीन व तिब्बत के साथ जुड़े थे। उसी प्रकार से भोज पत्र के तार भी चीन के साथ जुड़े हैं। भोज पत्र को चीन और तिब्बत में काफी पवित्र माना जाता है। गोंपो में होने वाले पूजा अनुष्ठान में भोजपत्र का प्रयोग किया जाता है। ऐसे में भोजपत्र की वहां पर मुंह मांगी कीमत भी दी जाती है। इसके चलते तस्कर चंबा से भोजपत्र की तस्करी करके चीन और तिब्बत में पहुंचा रहे हैं। वन विभाग मेपल मामले में तो बड़ा खुलासा कर चुका है, लेकिन भोजपत्र मामले में अभी तक मुख्य आरोपी विभाग की गिरफ्त में नहीं आ सके हैं। इसको लेकर जांच टीम की कार्यप्रणाली कहीं न कहीं सवालों के घेरे में है।
उधर, वनमंडल अधिकारी चंबा कृतज्ञ कुमार ने बताया कि भोजपत्र अवैध तस्करी मामले की जांच का जिम्मा वन परिक्षेत्र अधिकारी मसरूंड को सौंपा गया है। पकड़े गए आरोपियों ने जिन लोगों के नाम बताए थे, उनके ठिकानों पर जांच टीम ने दबिश दी है। लेकिन अभी तक मुख्य आरोपी पकड़ में नहीं आए हैं। जांच टीम उन्हें पकड़ने का पूरा प्रयास कर रही है।