चंबा। आकांक्षी जिले के मेडिकल कॉलेज में कैलशियम की दवाई खत्म हो चुकी है। मरीजों को निजी दवाई की दुकानों में जाकर पैसे देकर यह दवाई खरीदनी पड़ रही है।
मेडिकल कॉलेज की शायद ही ऐसी कोई ओपीडी होगी, जहां मरीजों को कैलशियम की दवाई नहीं लिखी जाती हो। हड्डी और गायनी ओपीडी में मरीजों को सबसे ज्यादा कैलशियम की दवाई लिखी जाती है। गर्भवती महिलाओं को प्रसव के बाद एक महीने के लिए यह दवाई खाने के लिए विशेषज्ञ परामर्श देते हैं। कमजोर हड्डी वाले मरीजों को भी विशेषज्ञ कैलशियम की दवाई लंबे समय तक खाने का परामर्श देते हैं। पिछले कुछ समय से मेडिकल कॉलेज में मरीजों को कैलशियम की दवाई नहीं दी जा रही है। रोजाना मेडिकल कॉलेज की 500 से 1000 की ओपीडी रहती है। इसमें अधिकतर मरीजों को विशेषज्ञ कैलशियम की दवाई लिखते हैं। मेडिकल कॉलेज की डिस्पेंसरी से रोजाना मरीजों को 2000 से 5000 कैलशियम की दवाई मुफ्त में दी जाती है। दवाई का स्टॉक खत्म होने से मरीजों को निजी दुकानों में जाकर दवाई खरीदनी पड़ रही है।
गर्भवती का जब प्रसव होता है तो उसे कैलशियम की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। मेडिकल कॉलेज में हरेक महीने 200 से 300 महिलाओं के प्रसव करवाए जाते हैं। ऐसे में इन महिलाओं को प्रसव के बाद कैलशियम की दवाई खाने को दी जाती है। इसके अलावा हड्डी रोग के मरीजों को भी विशेषज्ञ कैलशियम की दवाई लिखते हैं। पिछले कुछ महीनों से मेडिकल कॉलेज में मरीजों को यह दवाई नहीं मिल रही है। जो दवाई मेडिकल कॉलेज में मुफ्त मिलती थी, अब उसी दवाई का एक पत्ता उन्हें निजी दुकानों से 150 से 200 रुपये में खरीदना पड़ रहा है। हैरानी इस बात की है कि यदि डिस्पेंसरी में दवाई का स्टॉक खत्म होने वाला था तो प्रबंधन ने समय रहते दवाई के स्टॉक को लेकर ऑर्डर क्यों नहीं दिया।
मेडिकल कॉलेज के चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर बिपन ठाकुर ने बताया कि डिस्पेंसरी में कैलशियम की दवाई उपलब्ध करवाने के लिए ऑर्डर दिया जा चुका है। जल्द ही मरीजों को डिस्पेंसरी में यह दवाई मिलना आरंभ हो जाएगी।