सिढकुंड पंचायत के छह गांवों में हो रही मिट्टीयुक्त पानी की आपूर्ति, लोग परेशान
मई 2025 में बारिश-भूस्खलन से जमीन धंसने से क्षतिग्रस्त हो गया है इनटेक टैंक
कच्ची बाबड़ी में पाइप डालकर पानी की सप्लाई दे रहा जलशक्ति विभाग
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। सिढकुंड पंचायत के सरीयारू, पद्दर, देगा, फाट, भोलू और सतेगा गांवों के करीब 50 परिवार लंबे समय से मिट्टीयुक्त पानी पीने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि मई-जून 2025 में भारी बारिश और भूस्खलन के कारण पेयजल योजना का इनटेक जमीन धंसने से क्षतिग्रस्त हो गया था। इसके बाद कर्मचारियों ने स्थायी व्यवस्था करने के बजाय कच्ची बाबड़ी बनाकर उसमें पाइप डाल दिया। इसी से पानी की आपूर्ति शुरू कर दी। न तो नया इनटेक टैंक बनाया और न ही स्टोरेज टैंक में पानी पहुंचाने की व्यवस्था की। कई जगह टूटी पाइपलाइन को रबड़ से जोड़कर काम चलाया जा रहा है। वर्तमान में भी वे मिट्टी युक्त पानी पीने को विवश हैं। कई बार शिकायत करने के बाद भी अधिकारियों ने समस्या का समाधान नहीं किया।
रत्न चंद, कैलाश चंद, सुरेंद्र कुमार, सोनू, पवन कुमार, मानसिंह, नर सिंह, प्रकाश चंद, चतरो राम, टेक चंद, तिलक राज, राजेंद्र कुमार, मनोज कुमार, बबलू और धारो राम ने बताया कि समस्या के समाधान के लिए 12 फरवरी को सहायक अभियंता उदयपुर को ज्ञापन दिया था। 23 मार्च और 25 अप्रैल 2026 को भी शिकायत की गई लेकिन पंचायत चुनाव का हवाला देकर काम बाद में करवाने की बात कही गई। सात जुलाई को अधिशासी अभियंता को पत्र देने के बावजूद धरातल पर सुधार नहीं हुआ।
ये हो सकती हैं बीमारियां
- मिट्टी वाले पानी में बैक्टीरिया (जैसे ई-कोलाई), वायरस और परजीवी बहुत अधिक मात्रा में होते हैं। इसे पीने से तुरंत पेट से जुड़ी बीमारियां हो सकती हैं।
- डायरिया और दस्त शरीर में पानी की कमी हो सकती है।
- हैजा और टायफाइड हो सकता है।
- पेट में मरोड़ और मल के साथ खून आने की समस्या
ऐसे करें बचाव
डॉ. जालम भारद्वाज ने बताया कि मिट्टी युक्त पानी पीने से परहेज करना चाहिए। पानी उबाल कर पीना चाहिए। गंदा पानी पीने से यदि कोई बीमारी का संकेत मिलता है तो तुरंत चिकित्सक से मिलें और चिकित्सीय परामर्श से दवाइयां लें।
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सड़क निर्माण के चलते पानी मटमैला हुआ है। प्राकृतिक स्रोत के साथ इनटेक टैंक के निर्माण का प्रस्ताव स्वीकृत हो चुका है। विभाग ने इसी माह टेंडर आमंत्रित कर कार्य शुरू करने का लक्ष्य रखा है। - प्रवीण कांत, सहायक अभियंता, जलशक्ति विभाग