तीसा और कल्हेल इलाके में नहीं थम रही पीले चंदन के नाम से मशहूर कशमल की तस्करी
वन भूमि से अवैध रूप से निकालकर बाहरी राज्यों में भेजी जा रहीं जड़ें
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। चुराह में पीले चंदन यानी कशमल की अवैध तस्करी थमने का नाम नहीं ले रही है। रोजाना ट्रकों में भरकर चंबा से बाहरी राज्यों में इन जड़ों को भेजा जा रहा है।
वन भूमि से सरेआम इन जड़ों को निकालकर सड़क के किनारे ढेर लगाए जा रहे हैं जबकि वन संपदा की रखवाली करने वाले सबकुछ देखकर भी आंखें बंद कर बैठे हैं। कल्हेल, रखालू, तीसा, सनवाल सहित अन्य इलाकों में इन जड़ों को अवैध रूप से उखाड़ा जा रहा है। इससे प्रकृति पर भी बुरा असर पड़ सकता है। इसके प्रमाण पिछले साल भी जिले भर में देखने को मिले थे। गांव के साथ भूस्खलन होने से लोगों के घरों को खतरा पैदा हो गया। उसी खतरे को नजरअंदाज कर सरकार ने जंगलों से कशमल की जड़ों को उखाड़ने की अनुमति ठेकेदारों को दी है। वन विभाग भी इसमें कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है।
रात के अंधेरे में कशमल की जड़ें उखाड़ी जा रही हैं। दिन के समय जो सड़क खाली नजर आती है, वहां अगली सुबह इन जड़ों के ढेर लगे होते हैं। विभागीय कर्मचारी इस बात की भी शिनाख्त नहीं करते कि रातोंरात इतनी मात्रा में कशमल की जड़ें कहां से आ गईं।
जानकारी के अनुसार कशमल की बाहरी बाजारों में अच्छी कीमत मिलती है। इसके चलते तस्करों की नजर चुराह के जंगलों पर है। स्थानीय लोगों में वेद प्रकाश, सुरेंद्र, अजय कुमार, भागचंद, सोभिया राम, केवल और सूरज ने प्रशासन और वन विभाग से मांग की है कि जंगलों में गश्त बढ़ाई जाए और तस्करों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
सेवानिवृत आईएएस अधिकारी जगदीश शर्मा भी चुराह के जंगलों से अवैध रूप से उखाड़ी जा रही कशमल की जड़ों का मुद्दा उठा चुके हैं। बावजूद इसके अभी तक कोई ठोस कार्रवाई देखने को नहीं मिल रही है।
वन अरण्यपाल राकेश कुमार ने बताया कि विभागीय कर्मचारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि परमिट पर सिर्फ निजी भूमि से कशमल की जड़ों को निकालने दिया जाए। वन भूमि से जो भी जड़ों को निकालता है, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।