मेडिकल कॉलेज के प्लांट में बचे थे सिर्फ दो सिलिंडर, इनमें थी प्रेशर की कमी
बिना ऑक्सीजन सिलिंडर घायल को टांडा पहुंचा पाना हो रहा था नामुमकिन
एंबुलेंस कर्मियों ने भी घायल के रिश्तेदारों को इस रिस्क से किया बार-बार आगाह
प्रवीण कुमार
चंबा। ऑक्सीजन सिलिंडर में प्रेशर सही नहीं है, फिर भी मरीज को ले जाना चाहो तो अपने रिस्क पर ले जा सकते हो। रास्ते में ऑक्सीजन की कमी से मरीज को कुछ हुआ तो उसकी जिम्मेदारी हमारी नहीं होगी।
यह बात एंबुलेंस कर्मचारियों और घायल अलका देवी के रिश्तेदारों को मेडिकल कॉलेज ऑक्सीजन प्लांट में तैनात कर्मचारी ने कही। उन्होंने बताया कि उनके पास सिर्फ दो ऑक्सीजन सिलिंडर हैं। ये भरे हैं लेकिन प्रेशर कम है। एंबुलेंस में लगने वाले ऑक्सीजन सिलिंडरों में प्रेशर अधिक होना चाहिए। यह बात को सुनने के बाद एंबुलेंस कर्मचारी भी हाथ खड़े करने लगे। उन्होंने घायल के रिश्तेदारों से कहा कि यदि रास्ते में कम प्रेशर की वजह से मरीज को ऑक्सीजन नहीं मिली तो वे उन पर इल्जाम लगाएंगे। इसलिए उन्होंने कम प्रेशर वाले सिलिंडरों को एंबुलेंस में लगाने से हाथ खड़े कर दिए। घायल के रिश्तेदारों ने उनसे कहा कि मौजूदा समय में मरीज को टांडा पहुंचाना जरूरी है। सिलिंडर में कम ऑक्सीजन है या कम प्रेशर है। जैसे तैसी व्यवस्था करके मरीज को टांडा पहुंचाने की व्यवस्था करवाओ। माहौल को देखते हुए प्लांट के कर्मचारी ने मशीन के जरिए सिलिंडरों का प्रेशर जांचा और एंबुलेंस में लगाने के लिए दे दिए। उधर, मेडिकल कॉलेज प्रवक्ता डॉक्टर मानिक सहगल ने बताया कि 200 ऑक्सीजन सिलिंडर लाने के लिए ट्रक जा चुका है। शुक्रवार तक सप्लाई चंबा पहुंच सकती है।
मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन सिलिंडर खत्म हो चुके हैं। बुधवार को चंबा से सिलिंडर लाने के लिए ट्रक को मंडी भेजा गया है। जो ऑक्सीजन प्लांट यहां संचालित हैं, उनकी ऑक्सीजन पाइप लाइन के जरिए अस्पताल के वार्डों में दी जाती है जबकि ऑक्सीजन सिलिंडर की आपूर्ति चंबा में मंडी की कंपनी करती है। पहले यह आपूर्ति नूरपुर से होती थी लेकिन सरकार ने वहां की कंपनी को रद्द करके मंडी की कंपनी को यह ठेका दिया है।