चंबा। वीरवार को सुबह से लेकर शाम तक कूड़े का पहाड़ धधकता रहा। इससे लोगों की सांसें घुटती रहीं। ग्रामीणों की मानें तो कुरांह के आसपास के इलाकों में कुछ लोग टीबी, कैंसर और सांस जैसी बीमारी से पीड़ित हैं और इस कचरे के धुएं से और बीमारी लगने का डर हो रहा है। बिना मास्क के घर से बाहर निकलना काफी मुश्किल हो गया है। इलाके में बसे लोग हवा की क्वालिटी को लेकर चिंतित हैं और राहत के लिए प्रशासन से मदद की गुहार लगा रहे हैं।
लोगों का आरोप है कि अगर, कूड़े के पहाड़ को पहले ही हटा लेते तो इस तरह की घटना नहीं सामने आती। कुरांह के साथ मैहला, चढ़ी, गागला और बंदला आदि पंचायतों के कई गांव में रहने वाले लोगों को सांस लेने में दिक्कत आने लगी है। लोगों का कहना है कि आए दिन इस तरह की परेशानी आती है, लेकिन नगर परिषद चंबा ने ऐसी घटनाओं पर गंभीरता नहीं दिखाई। जिस वजह से यह कूड़ा संयंत्र आसपास के गांव में रहने वाले लोगों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है। साल 2013 में भी कूड़ा संयंत्र में आग लगने की घटना सामने आ चुकी है। उस दौरान भी भारी नुकसान हुआ था। उन्होंने कहा कि चारों ओर धुआं फैला है। इस कारण स्थानीय लोगों को मास्क पहनाना पड़ रहा है।
जब से कुरांह में डपिंग साइट बनाया है। तब से क्षेत्र में सांस और टीबी के ही मरीज निकल रहे हैं। पिछले कई साल से सांस की दिक्कतें हैं। जिसका सबसे बड़ा कारण कूड़ा संयंत्र में पड़ा कचरा है।
शेलम सिंह, ग्रामीण, कुरांह
10 साल पहले भी ऐसी ही घटना हुई थी। उस दौरान भी लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। सांस की बीमारी से जूझ रहा हूं। इस उठते धुएं से और परेशानी हो रही है। नगर परिषद और प्रशासन को इसको लेकर उचित कदम उठना चाहिए।
चरणों राम, ग्रामीण, कुरांह
कई साल पहले इस कूड़ा संयंत्र में काम करते पति की मौत हो गई थी। लेकिन, नगर परिषद की ओर से कोई सहायता नहीं की गई थी। इस धुएं से लोग बीमारी की चपेट में आ सकते हैं। पहले ही इलाके में लगभग 10 से अधिक सांस के मरीज है।
लांबी देवी, ग्रामीण, कुरांह