फरवरी के अंतिम सप्ताह मेंं भी बारिश न होने से बढ़ी किसानों-बागवानों की चिंता
मेघ न बरसने से गेहूं, जौ और बेमौसमी सब्जियों की पैदावार पर पड़ सकता है असर
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। मौसम की बेरुखी ने एक बार फिर किसानों-बागवानों की चिंता बढ़ा दी है। फरवरी के अंतिम सप्ताह में पर्याप्त वर्षा न होने से खेतों में नमी लगातार घट रही है।
किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए बादलों का इंतजार कर रहे हैं। समय पर बारिश नहीं हुई तो गेहूं, जौ और बेमौसमी सब्जियों की पैदावार पर सीधा असर पड़ सकता है। ग्रामीण इलाकों में कई जगह खेतों की मिट्टी सूखने लगी है। जिन किसानों के पास सिंचाई के सीमित साधन हैं, उनके लिए स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण बन गई है। रबी की फसल गेहूं इस समय दाने भरने की अवस्था में है। पर्याप्त नमी न मिलने पर दाने पतले रह सकते हैं जिससे उत्पादन घटने की आशंका है। जौ की फसल भी इसी चरण में है और उसे भी हल्की बारिश की जरूरत है।
किसानों में सुरेश कुमार, जीवन कुमार, दौलत राम, किशन चंद, योग राज, महिंद्र सिंह, मुकेश कुमार का कहना है कि बेमौसमी सब्जियों जैसे मटर, गोभी, टमाटर और पालक पर भी सूखे का असर दिखाई देने लगा है। यदि जल्द वर्षा नहीं हुई तो सिंचाई पर अतिरिक्त खर्च बढ़ेगा। इससे लागत में इजाफा होगा। सेब, आड़ू और अन्य फलों के पौधों के लिए भी इस समय मिट्टी में नमी जरूरी है। यदि मौसम शुष्क बना रहा तो फूलों और फल सेटिंग पर असर पड़ सकता है। इस समय एक अच्छी बारिश हो जाए तो गेहूं की फसल संभल जाएगी। वरना दाने कमजोर रह जाएंगे। फिलहाल किसानों की निगाहें आसमान पर टिकी हैं।
यदि अगले कुछ दिनों में हल्की या मध्यम वर्षा होती है तो फसलों को बड़ा सहारा मिलेगा और संभावित नुकसान की भरपाई हो सकेगी। विभाग ने किसानों को जरूरत के अनुसार सिंचाई करने और खेतों में नमी के संरक्षण के उपाय अपनाने की सलाह दी है।
- डॉ. भूपेंद्र सिंह, उपनिदेशक, कृषि विभाग