चंबा जिले के ऊपरी क्षेत्रों में हुई ओलावृष्टि से फसल को पहुंचा भारी नुकसान
बागवान जता रहे 50 फीसदी तक सेब की फसल को नुकसान होने की आशंका
ओलों की मार से टूटीं टहनियां, जहां एंटी हेलनेट नहीं थे, वहां पहुंची ज्यादा क्षति
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। जिले के ऊपरी क्षेत्रों में बीते दिन हुई ओलावृष्टि ने बागवानों के सपनों पर चोट पहुंचाई है। मौसम की मार से कई बगीचों में फलदार पेड़ों की टहनियां टूट गई हैं।
तैयार हो रही फसल को भी भारी नुकसान पहुंचा है। हालात ऐसे हैं कि बागवान अब करीब 50 प्रतिशत तक फसल खराब होने की आशंका जता रहे हैं। इससे उनकी सालभर की मेहनत और आय पर संकट खड़ा हो गया है।
सलूणी, साहो, चुराह, मसरूंड और भरमौर क्षेत्र में ओलावृष्टि का सबसे अधिक असर देखने को मिला है। कई बगीचों में पेड़ों की शाखाएं टूट कर जमीन पर गिर गई हैं। जिन बागवानों ने एंटी हेलनेट नहीं लगाए थे, उनके बगीचों में नुकसान और अधिक हुआ है। ओलावृष्टि के बाद बागवान इस चिंता में हैं कि बची हुई फसल और पौधों को कैसे सुरक्षित रखा जाए। जानकारी और तकनीकी मार्गदर्शन के अभाव में बागवान परेशान हैं। उनका कहना है कि समय रहते उचित सलाह नहीं मिली तो नुकसान और बढ़ सकता है।
बागवानों में होशियारा राम, कुलदीप कुमार, पवन कुमार, जगदीश कुमार और दीवान चंद ने बताया कि मई में हुई ओलावृष्टि ने बगीचों को बुरी तरह प्रभावित किया है। पेड़ों की टहनियां टूट चुकी हैं। फलों को भी नुकसान पहुंचा है। यदि जल्द विभागीय सहायता और मार्गदर्शन नहीं मिला तो नुकसान और अधिक बढ़ सकता है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि प्रभावित क्षेत्रों में तुरंत राहत और तकनीकी सहायता उपलब्ध करवाई जाए। उन्होंने उद्यान विभाग से मांग की है कि विभागीय अधिकारी तुरंत प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करें, नुकसान का सही आकलन करें और बागवानों को फसल बचाने के उपाय बताए जाएं।
उद्यान विभाग के उपनिदेशक डॉ. प्रमोद शाह ने कहा कि ओलावृष्टि से बगीचों को नुकसान पहुंचा है। विभाग जल्द प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण करेगा और नुकसान की रिपोर्ट तैयार की जाएगी। बागवानों को पौधों और फसलों को बचाने के लिए जरूरी तकनीकी सलाह भी दी जाएगी।