चंबा। हिमाचल की पावन धरा और शिव नगरी के नाम से विख्यात चंबा का ऐतिहासिक चौगान बुधवार को आध्यात्मिक पुनरुत्थान का साक्षी बनने जा रहा है। करीब 1000 वर्ष पूर्व राजा साहिल वर्मन ने चंबा रियासत की नींव रखी थी। लगभग उसी कालखंड में सोमनाथ के प्रथम ज्योतिर्लिंग पर विदेशी आक्रांताओं के हमले हो रहे थे। 1000 वर्ष पुराने चंबा शहर से सोमनाथ महादेव के उन प्राचीन और दिव्य अवशेषों की यात्रा शुरू हो रही है, जिन्हें सदियों तक गुमनामी में सुरक्षित रखा गया था। हाल ही में इन दिव्य अवशेषों को आध्यात्मिक गुरु श्रीश्री रविशंकर को सौंपा गया, जिनके मार्गदर्शन में अब इन्हें जन-कल्याण के लिए पूरे हिमाचल के भ्रमण पर लाया गया है। बुधवार शाम को चंबा का वातावरण वेद मंत्रों और शिव भजनों से गुंजायमान रहेगा। कार्यक्रम का शुभारंभ दोपहर बाद 4 बजे गुरुकुल के वेद बटुकों की ओर से मंगलकारी वेद मंत्रोच्चारण से होगा। 4:30 बजे एक विशेष वीडियो प्रस्तुति के माध्यम से श्रद्धालुओं को सोमनाथ के गौरवशाली इतिहास और इन अवशेषों को बचाने के संघर्ष से रूबरू कराया जाएगा। शाम 5 बजे मुख्य पूजा होगी। इसमें हजारों श्रद्धालु एक साथ सामूहिक ध्यान और दिव्य सत्संग के माध्यम से आत्मिक शांति का अनुभव करेंगे।
आर्ट आफ लिविंग के मीडिया प्रबंधक मनुज शर्मा ने बताया कि यह 10 दिवसीय हिमाचल सोमनाथ ज्योतिर्लिंग दर्शन यात्रा प्रदेश के कोने-कोने को शिवमय करेगी। इस पावन यात्रा का आगाज बुधवार पहली अप्रैल को ऐतिहासिक चंबा से हो रहा है। इसके बाद दो अप्रैल को यात्रा कांगड़ा के कैलाश आश्रम पहुंचेगी। यहां से तीन अप्रैल को हमीरपुर और चार अप्रैल को ऊना के श्रद्धालुओं को महादेव के दर्शन सुलभ होंगे। भक्ति का यह सफर पांच अप्रैल को छोटी काशी मंडी और छह अप्रैल को देव घाटी कुल्लू में पड़ाव डालेगा। आठ अप्रैल को सोलन और नौ अप्रैल को प्रदेश की राजधानी शिमला में भव्य आयोजन होंगे। अंततः 10 अप्रैल को नाहन में इस ऐतिहासिक यात्रा का भव्य समापन होगा।