अगस्त में क्षतिग्रस्त एनएच। फाइल फोटो
चंबा। साल 2025 भरमौरवासियों और हजारों मणिमहेश यात्रियों को कभी नहीं भूलेगा। अगस्त में बारिश ने ऐसी तबाही मचाई कि प्रशासन को मणिमहेश यात्रा रोकनी पड़ी। कोई श्रद्धालु राधाष्टमी का स्नान नहीं कर पाए। इतना ही नहीं, वर्षों पुरानी डल तोड़ने की परंपरा भी पूरी नहीं हो पाई।
डल झील का जलस्तर अपनी सीमा से ऊपर चला गया। इससे धन्छौ नाले में पानी का सैलाब आ गया। हजारों श्रद्धालु मणिमहेश सहित अन्य पड़ावों में फंस गए। भरमौर एनएच रावी नदी में आई बाढ़ में तबाह हो गया। भरमौर से सैकड़ों श्रद्धालु रावी के मुहाने से पैदल 60 किलोमीटर सफर करके चंबा पहुंचे। जहां से उन्हें बस के जरिये पठानकोट भेजने की व्यवस्था की गई। एक सप्ताह तक दूरसंचार की सेवाएं बंद रही। लोगों के फोन शोपीस बन गए। प्रशासन ने सेटेलाइट फोन के जरिये भरमौर में फंसे लोगों को रेस्क्यू करने के लिए वहां के प्रशासन से संपर्क साधा।
20 श्रद्धालुओं की मौत
इस आपदा में 20 मणिमहेश यात्रियों की मौत हुई। सैकड़ों वाहन श्रद्धालु लूणा, भरमौर, हड़सर और खड़ामुख में छोड़कर अपने घरों को लौटे। 15 दिन बाद जब मार्ग छोटे वाहनों के लिए खुला तो श्रद्धालु अपने वाहनों को लेने के लिए दोबारा चंबा आए।
चिनूक पहली बार उतरा
चंबा में पहली बार वायु सेना के चिनूक हेलिकॉप्टर के जरिये मणिमहेश में फंसे यात्रियों को सुरक्षित चंबा लाया गया। आपदा की वजह से लोगों को पहली बार इस हेलिकॉप्टर को नजदीक से देखने का मौका मिला। प्रशासन के लिए भी इस प्रकार की आपदा में रेस्क्यू करना खुद के लिए बड़ी चुनौती थी।
पीएम को आना पड़ा
भारी बारिश के कारण कई परिवारों के घर जमींदोज हो गए। उन परिवारों को 2025 अपनी जिंदगी में कभी नहीं भूल सकता। प्रधानमंत्री ने धर्मशाला पहुंचकर इन परिवारों से मुलाकात की और उन्हें राहत देने का आश्वासन दिया।