न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी की अदालत ने सबूतों, गवाहों के आधार पर सुनाया फैसला
बिजली लाइन बिछाने के कार्य की बकाया राशि के मामले में दायर की थी याचिका
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। जनजातीय क्षेत्र पांगी में बिजली लाइनों का कार्य करने के बावजूद 8,25,000 रुपये का बकाया राशि का भुगतान न होने के मामले में सबूतों और गवाहों को ध्यान में रखते हुए न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी चंबा पार्थ जैन की अदालत ने याचिका खारिज कर दी है।
दायर याचिका के मुताबिक पांगी में 33 केवी एचटी लाइन बिछाने, स्थापित करने, परीक्षण करने और चालू करने से संबंधित कुछ कार्य आरोपियों की ओर से पीड़ित अमर चंद को आवंटित किया। इनमें स्टील ट्यूबलर पोल (डबल, ट्रिपल और चार पोल संरचनाएं), आरसीसी मफिंग, कंडक्टर फिटिंग, जीआई तार से अर्थिंग, ब्रेसिंग और पेंटिंग शामिल रहे। शिकायतकर्ता ने बताया कि अब तक उन्होंने विभिन्न कार्यों के तहत 8,25,000 बकाया राशि लेनी है। उन्हाेंने प्रतिवादियों से बार-बार संपर्क किया और उनसे बकाया राशि का भुगतान करने का आग्रह किया लेकिन उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की।
पीड़ित अमर चंद ने बताया कि वर्ष 2011 में 6 जुलाई 2010 में कार्य आदेश के अनुसार श्रमिकों और मशीनरी का उपयोग कर 2,50,000 रुपये मूल्य का पहला कार्य सफलतापूर्वक पूरा किया। इसकी एवज में उन्हें 2,00,000 रुपये का भुगतान किया गया। शेष 50,000 रुपये बयाना राशि के रूप में काट ली गई। वर्ष 2012 में गार्ड क्वार्टर से मुरथलू तक लगभग 3 किलोमीटर लंबी एचटी लाइन बिछाने के साथ 500 मीटर का अतिरिक्त कार्य पूरा किया था। पांगी स्थित विद्युत उपमंडल के निकट 3 किलोमीटर कार्य की कुल लागत 7,50,000 रुपये आंकी गई थी। इसमें उन्हें फरवरी 2013 में केवल 1,00,000 रुपये का भुगतान हो पाया। अतिरिक्त 500 मीटर कार्य की लागत 1,25,000 आंकी गई थी। इसका भुगतान नहीं हुआ। अब तक कंपनी पर 8,25,000 रुपये बकाया हैं। पीड़ित ने बताया कि बार-बार निजी कंपनी से संपर्क करने के बाद भी भुगतान नहीं किया गया। न्यायालय ने विभिन्न पहलुओं की गहनता से जांच करने, गवाह और सबूतों को ध्यान में रखकर याचिका खारिज कर दी है।