उपभोक्ताओं ने अधिशासी अभियंता को पत्र भेजकर विभिन्न पहलुओं पर जताई आपत्ति
कहा- सरकारी निर्देश खत्म नहीं कर सकते व्यक्तिगत अधिकार, असहमति जताने का हक
संवाद न्यूज एजेंसी
बनीखेत (चंबा)। क्षेत्र में स्मार्ट मीटर की स्थापना को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। क्षेत्र के लोगों ने बिजली बोर्ड के अधिशासी अभियंता पंकज राठौर को विस्तृत जवाबी पत्र सौंपा है।
इसमें स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया और उससे संबंधित विभिन्न पहलुओं पर आपत्ति जताई है। उपभोक्ताओं अविनाश, मोहित शर्मा, एडवोकेट आरके महाजन, एडवोकेट बलवंत और एडवोकेट आरएल ठाकुर ने कहा कि स्मार्ट मीटर भारत सरकार के निर्देशों और आरडीएसएस के तहत लगाए जा रहे हैं। सरकारी दिशा-निर्देश किसी उपभोक्ता के व्यक्तिगत अधिकारों को समाप्त नहीं कर सकते। उन्हें अपनी सहमति या असहमति जताने का अधिकार है। उन्होंने बिजली बोर्ड के इस दावे पर भी सवाल उठाए हैं कि 9 से 23 फरवरी के बीच स्मार्ट मीटरों को लेकर जागरूकता कार्यक्रम चलाए गए थे। उन्होंने कहा कि बनीखेत क्षेत्र में इस अवधि के दौरान ऐसा कोई कार्यक्रम नहीं हुआ। न ही उन्हें किसी प्रकार की सूचना, पोस्टर, बैठक या जन-जागरूकता अभियान की जानकारी दी गई। यह भी आरोप लगाया कि स्मार्ट मीटर स्थापना से जुड़ीं महत्वपूर्ण जानकारियां लोगों के सामने स्पष्ट रूप से नहीं रखी गईं। इनमें प्रारंभिक लागत, वार्षिक रखरखाव खर्च, संभावित अतिरिक्त शुल्क, सुरक्षा जमा राशि, डाटा गोपनीयता और सुरक्षा प्रोटोकॉल जैसे मुद्दे शामिल हैं। स्मार्ट मीटर व्यवस्था को अनिवार्य नहीं, बल्कि वैकल्पिक बताया गया है। उपभोक्ताओं ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को उसकी सहमति के बिना नई प्रणाली अपनाने के लिए बाध्य नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने बिजली अधिनियम और सांविधानिक अधिकारों का हवाला देते हुए उपभोक्ताओं के चयन के अधिकार की बात उठाई है। मांग की है कि उपभोक्ताओं की चिंता का समाधान होने और पारदर्शी जानकारी उपलब्ध करवाए जाने तक स्मार्ट मीटरों की स्थापना प्रक्रिया आगे न बढ़ाई जाए।