चंबा। मासिक आय योजना (एमआईएस) के तहत जमा करवाए तीन लाख रुपये और रिकरिंग डिपॉजिट (आरडी) की राशि न देने पर जिला उपभोक्ता आयोग धर्मशाला/चंबा की अदालत ने कंपनी पर शिंकजा कसा है। अदालत के आदेश पर अब अर्थ कोष निधि कंपनी एमआईएस के तीन लाख रुपये और आरडी के 96,330 रुपये सात प्रतिशत ब्याज दर सहित उपभोक्ता को अदा करेगी।
साथ ही कंपनी को उपभोक्ता को 3,000 रुपये मुआवजा और 3,000 रुपये का मुकदमेबाजी खर्च देने को भी कहा है। आयोग में पहुंचे मामले में शिकायतकर्ता रूप चंद सूरी निवासी एलो, डाकघर सिढकुंड ने बताया कि उसने मासिक आय योजना (एमआईएस) के तहत 28 अक्तूबर 2019 को 60 महीनों की अवधि के लिए अर्थ कोष निधि में तीन लाख रुपये जमा किए थे। कोष की ओर से 27 अक्तूबर 2024 तक यह राशि वापस करनी थी। कंपनी ने इसके तहत उपभोक्ता को 2,470 रुपये की मासिक भुगतान करने की बात कही। जनवरी 2023 को अर्थ कोष निधि कंपनी की ओर से मासिक आय की किस्तों का भुगतान करना बंद कर दिया और तेलका स्थित अपना कार्यालय बंद कर दिया। इसके अलावा शिकायतकर्ता ने 60 महीनों की अवधि के लिए 2470 रुपये प्रति माह की एक आरडी भी खोली थी। 30 नवंबर 2019 को अनुबंध किया था। पीड़ित ने 2,470 रुपये की मासिक आय का भुगतान करना शुरू किया, लेकिन कपंनी के जनवरी 2023 में कार्यालय बंद होने से यह भुगतान रुक गया। इसके बाद उसने कई बार अर्थ कोष प्रबंधन से संपर्क करने के बाद भी कोई सकारात्मक पहल न होने से उपभोक्ता आयोग के न्यायालय में याचिका दायर की, जिसके तहत अब न्यायालय ने अपना फैसला सुना दिया है।