चंबा। श्री लक्ष्मीनाथ मंदिर प्रबंधन चंबा पुराने समय से जिला के समस्त मंदिरों में होने वाले त्योहारों एवं पर्वो के संचालन का समुचित प्रबंधन करता रहा है। यह बात चंबा वेलफेयर एसोसिएशन के प्रधान अश्वनी भारद्वाज, वित्त सचिव मदन कुमार व देवी प्रसाद शर्मा, महासचिव सुरेश कश्मीरी ने कही। उन्होंने कहा कि मणिमहेश की पवित्र यात्रा एवं बैरेवाली माता के मेले का पूरा खर्च भी मंदिर प्रबंधन ही उठाता रहा। उस वक्त भगवान कई जमीनों के मालिक थे और उस वजह से भगवान के भंडार अन्न-धन से भरे रहते थे। वर्ष 1954 में जब मुजारा एक्ट लागू किया गया तो श्री लक्ष्मीनाथ मंदिर समूह की जमीनें भी उस एक्ट की भेंट चढ़ गई। जिससे आर्थिकी पर प्रहार हो गया। फिर भी मंदिर में चढ़ावा व धाम परिसर से होने वाली आय से खर्चा चलता रहा। परंतु कोरोना काल में मंदिरों के बंद रहने से उस आय में भी कमी आने से मंदिर प्रबंधन की आय अति सूक्ष्म रह गई है।
उस वक्त जमीन खो जाने पर सरकार ने लक्ष्मीनाथ मंदिर समूह को वार्षिक अनुदान के रूप में 30422 रुपये देने की घोषणा की थी। जिसका अनुपालन मात्र 1993-94 तक ही हुआ।
बीते दिनों श्री लक्ष्मीनाथ मंदिर ट्रस्ट की बैठक में उपायुक्त द्वारा लिए गए फैसले से जनपद को उम्मीद जगी है कि अन्य उपायों के साथ-साथ वार्षिक अनुदान राशि का भुगतान भी प्रशासन द्वारा किया जाएगा। इस संबंध में डीसी चंबा द्वारा तहसीलदार को भी जरूरी कार्रवाई के लिए कहा है। एसोसिएशन ने आशा जताई है कि शीघ्र ही इस पर कार्रवाई की जाएगी।