तेलका (चंबा)। एक ओर प्रदेश सरकार बेहतर शिक्षा सुविधाओं के दावे कर रही है, वहीं वर्ष 2017 में खुले राजकीय महाविद्यालय तेलका को आज तक अपना भवन नसीब नहीं हो पाया है। वर्तमान में कॉलेज की कक्षाएं प्राइमरी स्कूल के भवन में संचालित हो रही हैं। हैरानी की बात यह है कि स्कूल के पास ही जमीन चयन प्रक्रिया अटक गई। बाद में वन विभाग की एफसीए क्लीयरेंस पर पेंच फंसा और शिक्षा विभाग के नाम जमीन नहीं हो रही है।
कॉलेज में इस समय कुल 116 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, जिनमें 87 छात्राएं और 29 छात्र शामिल हैं। शुरुआत में प्राइमरी स्कूल के पांच कमरे कॉलेज के लिए उपलब्ध करवाए गए थे, लेकिन अब केवल चार कमरों में ही पढ़ाई का कार्य चल रहा है। सीमित कक्षों के कारण नियमित कक्षाओं का संचालन, पुस्तकालय व्यवस्था और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों के आयोजन में दिक्कतें आ रही हैं।
सरकार ने क्षेत्र की छात्राओं को उच्च शिक्षा से जोड़ने के उद्देश्य से इस कॉलेज की शुरुआत की थी और यह पहल काफी हद तक सफल भी रही है। कॉलेज में छात्राओं की संख्या अधिक है, जिससे दूरदराज क्षेत्रों की बेटियों को घर के पास शिक्षा प्राप्त करने में राहत मिली है। हालांकि, स्थायी भवन के अभाव में विद्यार्थियों को बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों और विद्यार्थियों में इस बात को लेकर रोष है कि भवन निर्माण को लेकर ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे। जमीन का चयन हो चुका है, लेकिन निर्माण कार्य प्रारंभ नहीं हो पाया है। इससे शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है और भविष्य को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है।
फिलहाल विद्यार्थी और अभिभावक यही उम्मीद लगाए बैठे हैं कि सरकार जल्द ही औपचारिकताएं पूरी कर कॉलेज को उसका अपना भवन उपलब्ध करवाएगी, ताकि क्षेत्र के युवाओं को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सके।
भवन निर्माण के लिए एफसीए से अनापत्ति प्रमाण प्राप्त हो चुका है। अब संबंधित भूमि को राज्य सरकार द्वारा औपचारिक रूप से शिक्षा विभाग के नाम हस्तांतरित किया जाना शेष है। भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद ही भवन निर्माण कार्य शुरू किया जा सकेगा। वीरेंद्र सिंह, कार्यवाहक प्रधानाचार्य, तेलका कॉलेज
सरकार गंभीरता दिखाएं : जर्म सिंह
अभिभावक अध्यापक संघ के अध्यक्ष जर्म सिंह का कहना है कि 2017 में कॉलेज खुला था, लेकिन सरकार अभी तक बच्चों को स्थायी भवन नहीं दे पाई है। प्राइमरी स्कूल के कमरों में बच्चे स्नातक की पढ़ाई कर रहे है। सरकार इस मामले में गंभीरता दिखाए।